राष्ट्रसंत के बेबाक बोल: ब्रेक के बिना गाड़ी और जीवन दोनों ही असुरक्षित

जैन समाज के आयोजनों में जुटे जैन अनुयायी

By: Sushil Kumar Singh

Published: 07 Jul 2019, 06:35 PM IST

उदयपुर. गाड़ी कितनी ही कीमती हो यदि उसमें ब्रेक नहीं हैं तो गाड़ी और जीवन दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं। वैसे ही जीवन रूपी गाड़ी में संयम का ब्रेक नहीं है। संकट विपत्ति परेशानी अशांति को खुला निमंत्रण देने के समान है। असंयम अपने आप में अधर्म और पाप है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने दीक्षार्थी शंकर की दीक्षा के उपलक्ष्य में अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि असंयम अशांति का घर है। तबाही का मार्ग है। जहर शत्रु और आग तन का ही नुकसान करता है, परंतु असंयम उससे अनंत गुना घातक और खतरनाक है। कहा कि संयम सुरक्षा कवच है। तन मन और धन का असंयम मिले हुए वरदान को भी अभिशाप में बदल देता है। इस मौके पर वैरागी कावर घोड़ा शहर में निकाला गया। सभी धार्मिक सामाजिक धार्मिक संगठनों ने अभिनंदन किया प्रवर्तक मदन मुनि ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। कमल मुनि, संभव मुनि, महासती रवि रश्मि, महासती चेतना ने विचार व्यक्त किए। घनश्याम मुनिजी ने मंगलाचरण किया।

दिगम्बराचार्यो का सामूहिक प्रवेश
आदिनाथ दिगम्बर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सकल दिगम्बर जैन समाज के आचार्य वैराग्यनंदी महाराज एवं आचार्य सुन्दरसागर महाराज (42 पिच्छियां) आदि ससंघ का चातुर्मास के लिए हिरणगमरी से. 11 स्थित आदिनाथ भवन में प्रवेश हुआ। ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक शाह ने बताया कि आचार्य एवं ससंघ का प्रवेश सुबह 7 बजे कृषि मंडी गेट शोभायात्रा के साथ हुआ। बैंड-बाजे, हाथी-घोड़ा आकर्षण का केंद्र रहा। १४ जुलाई की दोपहर दो बजे नगर निगम परिसर में कलश स्थापना की बोली का आयोजन होगा।

सब बनें विनम्र: आचार्य ज्ञानेश
न्यू भूपालपुरा स्थित वाटिका में शनिवार को आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि जो विनम्र ही शालिन और संस्कारी होते हैं। उनकी वृति ऋजु और प्रवृत्ति करूण होती है। उनमें किसी तरह का अहम और आवेश नहीं होता। वे अपनी योग्यताओं के विकास में रूचि रखते हैं। इस तरह वे अपने जीवन की योग्यताओं का विकास करते जाते हैं। इसके विपरीत अयोग्य व्यक्ति केवल योग्य होने का दिखावा करते हैं। उनमें अपनी कमियों को स्वीकार करने की रूचि नहीं होती है। अगर कोई उन्हें कमी बता भी दे तो उस पर रोष, आक्रोश, प्रतिशोध की भावना उमडऩे लगती है। अत: व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए कि वो विनम्रता को जीवन में अपनाएं।

पंन्यास प्रवर का चातुर्मास प्रवेश
उदयपुर. जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में वर्षावास 2019 के लिए आराधना भवन में पंन्यास प्रवर आदि ठाणा का गाजे-बाजे भव्य शोभायात्रा के साथ नगर में प्रवेश हुआ। श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र हिरण ने बताया कि पंन्यास प्रवर विजय आदि ठाणा उपनगरीय क्षेत्रों से विहार करते हुए मुखर्जी चौक स्थित ओसवाल भवन पहुंचे, जहां पर सकल श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ की नवकारसी हुई। पंन्यास प्रवर गाजे-बाजे के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन पहुंचे, जहां महिला मंडल की ओर से कलश वंदन कर अगवानी हुई।

Sushil Kumar Singh
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