National Stress Awareness Day : भारत में हर तीसरा व्‍यक्‍ित है तनाव का शिकार, अगर आप भी हैं इसकी चपेट में तो जरूर पढें ये खबर

Madhulika Singh

Updated: 01 Nov 2017, 08:00:51 PM (IST)

Udaipur, Rajasthan, India

2020 तक मौतों का सबसे बड़़ा़ कारण बन जाएगा तनाव

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हिसाब से 2012 में 1,35,445 लोगों ने देश में मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या की। 2013 में 1,50,553 और 2014 में 1,70,812 लोगों कि मौत मानसिक रोगों के कारण हुई. WHO के अनुसार भारत में हर व्यक्ति के जीवनकाल में अवसाद ग्रस्त होने की 9 प्रतिशत संभावना होती है। ये संभावनाएं और इनके कारण साल दर साल विस्तृत होते जा रहे हैं। साल 2020 के आने तक होने वाली कुल मौतों के लिए जिम्मेदार कारणों में अवसाद दूसरा सबसे बड़ा कारण होगा। दस वर्ष पूर्व तक भारतीयों में अवसाद की गिरफ्त में आने वाले मरीज ज्यादातर 30 साल पार कर चुके होते थे, लेकिन अब तो बचपन से ही ये कारण व्यक्ति के इर्द-गिर्द मंडराते जा रहे हैं।

मानसिक बीमारियां आज घर-घर में आम जन-जीवन की जीवन शैली में शामिल हो गई है। 'डिप्रेशन' यानी नैराश्य, यानी मन और मानस का असहयोग, यानी प्रकृति से तादात्म्य न हो पाना या जीवन से आस्था उठ जाना। डिप्रेशन यानी जीने का नकारात्मक रवैया, स्वयं से अनुकूलन में असमर्थता आदि। जब ऐसा हो जाए तो उस व्यक्ति विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहां तक कि संबंध तक बेमानी हो जाते हैं। उसे सर्वत्र निराशा, तनाव, अशांति,अरुचि का ही आभास होता है। ऐसे में जरूरी है कि आप किसी मनोविज्ञानी से संपर्क करें। व्यक्ति को खुशहाल वातावरण दें। उसे अकेला न छोड़ें। उसकी रुचियों को प्रोत्साहित कर, उसमें आत्मविश्वास जगाएं और कारण जानने का प्रयत्न करें।

 

 

 

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