लेकसिटी के नवलखा महल में हाईटेक थियेटर तैयार

आर्ट गैलेरी, म्यूजियम व 16 संस्कारों के मॉडल में मिलेगा वेदिक ज्ञान का आनंद

By: Mukesh Hingar

Published: 21 Aug 2021, 09:42 PM IST

उदयपुर. गुलाबबाग स्थित नवलखा महल अब विविध नवाचारों एवं अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ वेदिक ज्ञान का प्रचार करेगा। 19 वीं शताब्दी में स्थापित यह महल अब आर्य समाज और स्वामी दयानंद की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का माध्यम बन चुका है। वर्तमान में इस महल के रखरखाव एवं संरक्षण का कार्य आर्य समाज ट्रस्ट के माध्यम से किया जा रहा है। इन दिनों ट्रस्ट की पहल पर इस स्थान को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ हाइटेक बनाने का कार्य किया जा रहा है।
श्रीमद दयानंद सत्यार्थ प्रकाश ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक आर्य ने बताया कि वर्तमान में इस नवलखा महल और स्वामी दयानंद से इसके जुड़ाव के प्रति यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से हाईटेक थियेटर तैयार किया गया है और बहुत ही जल्द यहां पर भारतीय संस्कृति में निर्दिष्ट सोलह संस्कारों की महत्ता को उद्घाटित करने के लिए विशेष मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आर्टिस्ट की सेवाएं ली जा रही है।

लेकसिटी के नवलखा महल में हाईटेक थियेटर तैयार

1882 केे अगस्त में ही उदयपुर आए थे दयानंद
उन्होंने बताया कि महर्षि दयानंद 10 अगस्त 1882 को उदयपुर आए। नवलखा महल कभी महाराणा का शाही अतिथि गृह था जिसे सन् 1992 में सत्यार्थ प्रकाश न्यास को सौंप दिया। उन्होंने बताया कि महर्षि 27 फरवरी 1883 तक यानि लगभग साढ़े छह महीने तक शहर में रहे और नवलखा महल में ही प्रवास किया।। इस पवित्र नवलखा महल में, महर्षि दयानंद ने युग प्रवर्तक ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के लेखन को पूरा किया। यह सत्यार्थ प्रकाश मानव जीवन के लिए उसका प्रोटोकॉल था। उन्होंने इसे मानव जाति के कल्याण के लिए और दिव्य ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने के लिए लिखा था। वे बताते कि मेवाड़ प्रवास के दौरान महर्षि दयानंद को सुनने वागड़ अंचल से गोविंद गुरु भी आया करते थे।

14 अध्यायों में समाया अथाह ज्ञान
स्वामी दयानंद द्वारा लिखित सत्यार्थ प्रकाश में 14 अध्याय हैं। सत्यार्थ प्रकाश मूल रूप से हिंदी में लिखा गया था, लेकिन यह अब तक संस्कृत समेत दुनियाभर की 24 से अधिक भाषाओं में अनुदित हो चुका है।

ऐसा है नवलखा महल
आर्य समाज से जुड़ी ललिता मेहरा ने बताया कि यहां एक यज्ञशाला भी है जहाँ वैदिक भजनों और वेदपाठों के साथ सामूहिक यज्ञों सहित यज्ञ प्रतिदिन सुबह और शाम किए जाते हैं। महल की पहली मंजिल में एक चित्र दीर्घा है जहां 67 तेल चित्रों में महर्षि के जीवन को, उनके आध्यात्मिक ज्ञान को चित्रित किया गया है। स्वामी दयानंद सरस्वती के लेखन कक्ष में एक 14-कोण और 14-कहानी वाला सत्यार्थ प्रकाश स्तम्भ या टॉवर भी स्थापित है। आंगन के एक तरफ एक हॉल में एक वैदिक पुस्तकालय और पढऩे का कमरा है। सत्यार्थ प्रकाश के सभी 24 अनुवाद-इसमें संस्कृत, फ्रेंच, जर्मन, स्वाहिली, अरबी और चीनी शामिल हैं। घूमने वाले कांच के मामले सत्यार्थ प्रकाश और महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथों को प्रदर्शित करते हैं।

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