script'Next two space missions in the country soon: Chandrayaan 3 and Venus' | ‘देश में जल्द अगले दो स्पेस मिशन: चन्द्रयान तीन और विनस’ | Patrika News

‘देश में जल्द अगले दो स्पेस मिशन: चन्द्रयान तीन और विनस’

अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. अनिल भारद्वाज ने कहा

उदयपुर

Published: August 22, 2021 09:18:05 am

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. देश में जल्द ही अगले दो स्पेस मिशन पर काम होगा। इसमें पहला चन्द्रयान तीन और दूसरा विनस यानी शुक्र मिशन। मंगलयान अभियान आधुनिक भारत की महान उपलब्धि है। फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री अहमदाबाद (पीआरएल ) के निदेशक व अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. अनिल भारद्वाज ने शनिवार को उदयपुर सौर वैधशाला सेमिनार हॉल भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला में विद्या भवन सोसायटी की ओर से आयोजित अंतरिक्ष विज्ञान परिचर्चा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रथम प्रयास में मंगल तक पहुंच कर इसरो ने इतिहास रच दिया है। पीआरएल सूर्य मिशन आदित्य एल.1 में सौर वायु के प्रेक्षण से जुड़े उपकरणों के निर्माण में शामिल है। उदयपुर सौर वैधशाला के वैज्ञानिक भी इसरो के इस मिशन में योगदान दे रहे हैं। देश में चंद्रयान तीन अभियान सहित शुक्र ग्रह पर अभियान की तैयारी चल रही है। चारों ओर से सल्फ्यूरिक एसिड से बने घने बादलों से घिरे शुक्र की सतह का अध्ययन चुनौतीपूर्ण है। इस पर वैज्ञानिक कार्य कर रहे हंै। चंद्रयान.2 मिशन में पीआरएल के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने हाल में चंद्रयान.2 से प्राप्त अत्याधुनिक एक्स-रे दूरबीन द्वारा सूर्य पर होने वाले माइक्रोफ्लेयर का अध्ययन किया है। इस पर आधारित शोध पत्र अमरीका के विश्व विख्यात एस्ट्रोफि जिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसन्धान प्रयोगशाला का उल्लेखनीय योगदान है। संस्था 75 वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इसके संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। उन्होंने संस्थान की विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की।
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‘देश में जल्द अगले दो स्पेस मिशन: चन्द्रयान तीन और विनस’
‘देश में जल्द अगले दो स्पेस मिशन: चन्द्रयान तीन और विनस’
सौर वैधशाला पीआरएल का विभाग
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि सूर्य पर शोध के उद्देश्य से 1975 में उदयपुर सौर वेधशाला की स्थापना हुई, जो कि पीआरएल का एक विभाग है। सौर वैधशाला में सूर्य पर होने वाले चुम्बकीय विस्फ ोटों तथा उसके पृथ्वी पर पडऩे वाले प्रभावों पर महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। वैधशाला के वैज्ञानिक सेटेलाइट से प्राप्त एक्स-रे तथा पराबैंगनी किरणों से प्राप्त आधुनिकतम चित्रों द्वारा सौर
विस्फोटों के रहस्यों की पड़ताल में लगे हैं। वैधशाला में आधुनिक प्रकाशीय दूरबीन तथा रेडियो टेलिस्कोप लगी हुई है।

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