सच को सहजता से समझा देने वाले शायर थे निदा फाजली

सच को सहजता से समझा देने वाले शायर थे निदा फाजली

Manish Joshi | Updated: 15 Jul 2019, 02:52:22 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

शहरयार, मोहम्मद अलवी और निदा फाजली पर दो दिवसीय सेमिनार सम्पन्न

उदयपुर. शहरयार हों, मोहम्मद अलवी हों या चाहे निदा फाजली, तीनों ही शायरों ने अपने समय में अपने-अपने अंदाज में समाज का आईना अपनी कलम में उतारा। समाज की सोच के साथ तीनों में अपनी कुछ खासियत भी थीं जिन पर गहराई से शोध की आवश्यकता है।

राजस्थान उर्दू अकादमी की दो दिवसीय कुल हिन्द सेमिनार के दूसरे दिन रविवार को वक्ताओं ने कहा कि साहित्य को साहित्य की नजर से देखना चाहिए। उन्हें किसी बंधन या विशेष विचारधारा से जोडक़र नहीं देखना चाहिए। साहित्य समाज का आईना है और हर कलमकार का उसे पेश करने का अपना अलग तरीका होता है। कुम्भा भवन में सेमिनार के दूसरे दिन डॉ. सरवतुन निसा खान, दिल्ली की शाहिना तब्बसुम, गोवा के फाजिया रबाब, बड़ौदा के अनवर जहीर ने मोहम्मद अलवी पर शोध-पत्र पढ़े। इस सत्र की अध्यक्षता दिल्ली के डॉ. हालिद अलवी ने की।
प्रो. शाफे किदवई अलीगढ़ ने शोध पत्र कहा कि शहरयार अपने समय में ऐसे शायर थे जो आगामी सामाजिक खतरों को भांपकर लोगों को आगाह करते थे। उन्होंने फि ल्मी शायरी में भी अपनी कला से समझौता नहीं किया। इस सत्र में शमीम तारिक मुम्बई ने भी शोध पत्र पढ़ा। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो.जमां आजुर्दा ने की। निदा फाजली पर प्रो.जमां आजुर्दा, डॉ. सादिक ने शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने कहा कि निदा फाजली की शायरी हर आम आदमी को साथ रखती हुई दिखाई देती है। समापन समारोह में मंच पर नंदकिशोर आचार्य, शीन काफ निजाम, मुख्य अतिथि जवाहर कला केंद्र के मोहम्मद फु रकान खान उपस्थित थे।

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