उदयपुर में सिविल टेंडर के लिए मांगी थी ई-निविदा, चहेतों के लिए चुपके से किया ‘घोटाले का खेल’

उदयपुर में सिविल टेंडर के लिए मांगी थी ई-निविदा, चहेतों के लिए चुपके से किया ‘घोटाले का खेल’

Mukesh Hingar | Publish: Nov, 29 2017 11:15:54 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर. विद्यालय निर्माण को लेकर मांगी ई-निविदा में चहेतों को फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया है।

उदयपुर . राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान योजना के तहत जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण, विद्यालय सुदृढ़ीकरण, नव क्रमोन्नत विद्यालय, एमएसडीपी, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र विद्यालय निर्माण को लेकर मांगी ई-निविदा में चहेतों को फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद के सिपहसलार खुद के बयानों में इसकी पुष्टि कर चुके हैं। दूसरी ओर प्रशासनिक अमला खुद को पाक-साफ बता रहा है।

 


टीएडी और योजना मद में संबंधित कार्यों के लिए परिषद मुख्यालय के राज्य परियोजना निदेशक ने गत 5 सितम्बर को जारी प्रपत्र की पालना में 11 सितम्बर को उदयपुर के 40 कामों सहित पाली, बांसवाड़ा, भरतपुर, बाड़मेर, जोधपुर , डूंगरपुर, जैसलमेर , अलवर, हनुमानगढ़, प्रतापगढ़ एवं धौलपुर में प्रस्तावित कामों की निविदाएं ऑनलाइन कर दी थी। संवेदकों से 10 अक्टूबर तक ई-निविदा प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता तय की थी। पालना में उदयपुर कार्यालय को भी निविदाएं ऑनलाइन करनी थीं, लेकिन स्थानीय कार्यालय ने आवेदन डाउनलोड करने की अंतिम तिथि के ठीक पहले ही निविदाएं ऑनलाइन कीं। देरी के बावजूद आवेदकों को समय सीमा का फायदा देने के बजाय तीन दिन बाद ही निविदाएं खोल दी गईं।

 

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तीन दिन में खोलीं करोड़ों की निविदाएं
लेखाविज्ञ पुस्तिका नियम के तहत खुली प्रतियोगी बोली या खुली निविदा में 5 लाख तक लागत के कामों के लिए प्रचार के लिए 10 दिन का समय देना जरूरी है। वहीं 5 से 50 लाख तक कामों के लिए 15 दिन और 50 लाख से अधिक लागत वाले कामों में विभाग को निविदा प्रकाशन की तिथि से एक माह की समय सीमा अनिवार्य है। आवश्यक परिस्थितियों में उपापन संस्था कारण अभिलिखित करते हुए नोटिस के प्रकाशन की समय सीमा को आधा किया जा सकता है। दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन ने 3 दिन पहले ही निविदा ऑनलाइन कर तय समय सीमा में खोलने की प्रक्रिया की। कायदे से स्थानीय योजना प्रबंधन को डाउनलोड तिथि से एक माह तक समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदकों को अवसर देना चाहिए था।

 

 

निविदाओं में ये कार्य किए गए हैं शामिल
खेरवाड़ा में जीपीयूएस झूंथरी, कोटड़ा के निचली सुबरी में क्रमश: 82.62 व 82.62 लाख, टीएडी मद से खेरवाड़ा के ही सेकण्डरी स्कूल कानपुर में 64.32 लाख, कटरावास काला में 55.63 लाख, लराठी में 64.32 लाख, बिछड़ी में 34.78 लाख, गवाड़ापाल में 54.79, दादिया में 17.28, केलथरा में 8.64, उमरड़ा में 17.28, बागपुरा में 19.20, गरनाला में 17.28 लाख, कुराबड़, सलूम्बर, गोगुंदा, बडग़ांव, गिर्वा, झाड़ोल, लसाडिय़ा, ऋषभदेव, झल्लारा, सेमारी, सायरा के 40 स्कूलों के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी।

 

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सिविल टेंडर से जुड़े सभी 40 निर्माण कार्यों को लेकर नियमानुसार प्रक्रिया की गई है। हमारे स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती गई।
मदनलाल पंवार, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक, रामाशिप

 

यह सही है कि निविदा डाउनलोड तिथि 11 सितम्बर थी, लेकिन मैंने 30 सितम्बर को उदयपुर कार्यालय का अतिरिक्त कार्यभार लिया था। जल्दबाजी में पता चला कि विभाग के पास एक ही डीएससी है। दो दिन में राजसमंद से डीएससी मंगाकर प्रक्रिया पूरी कराई। 40 निविदाएं डाउनलोड करने में भी समय लगा। मेरे स्तर पर देरी नहीं हुई।
रमेश कुमार चोरडिय़ा, सहायक अभियंता, रामाशिप

 

कार्य अधिकता के कारण मुझे प्रकरण के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। सही जानकारी एडीपीसी ही दे सकते हैं।
नरेश डांगी, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), उदयपुर

 

कुछ ही निविदाओं में देरी हुई थी। हमने समय पर कार्य करने की पूरी कोशिश की थी।
हेमसिंह, कनिष्ठ अभियंता, रामाशिप उदयपुर

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