अब हर निजी हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज में 25 प्रतिशत बिस्तरों का बनेगा ‘कोरोना ब्लॉक ’

- 100 बिस्तर से ऊपर के प्रत्येक हॉस्पिटल को रखनी होगी तैयारी

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. अब ऐसे प्रत्येक निजी हॉस्पिटल जो 100 बिस्तर से अधिक का है और हर निजी मेडिकल कॉलेज को अपने 25 प्रतिशत बिस्तरों के लिए अलग से कोरोना ब्लॉक खोला जाएगा। इस ब्लॉक को बकायदा विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोरोना गाइड लाइन के हिसाब से तैयार किया जाएगा, ताकि जरूरत पर इसे इस्तेमाल किया जा सकेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहितकुमार सिंह ने इसे लेकर आदेश जारी किया है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन व संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोविड-19 संक्रमण को महामारी घोषित किया है। इसे लेकर पैदा हुई स्थिति को देखते हुए राजस्थान एपिडेमिक डिजीजेज एक्ट 1957 की धारा दो के अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य में स्थित चिकित्सालयों व मेडिकल कॉलेजों को तत्काल यह व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। कोरोना वायरस से संक्रमित, संदिग्ध रोगियों को उपचार के लिए आइसोलेशन वार्ड के लिए आरक्षित रखना होगा। इसके अलावा कोविड से संक्रमित मरीजों को उपचार के लिए इन हॉस्पिटल व कॉलेजो में उपलब्ध आईसीयू में भी 25 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित रखे जाने होंगे। इसमें जरूरी उपकरण व औषधियों की उपलब्धता तय करनी होगी।

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उदयपुर में है ये पांच मेडिकल कॉलेज- गीताजंली मेडिकल कॉलेज - 1- पेसिफिक मेडिकल कॉलेज -2- अनन्ता मेडिकल कॉलेज- 1 (राजसमन्द)- अमरीकन मेडिकल कॉलेज-1- उदयपुर जिले में छोटे बड़े करीब 10 ऐसे बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल हैं, जो 100 बिस्तर से ऊपर के हैं।

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डॉ पोसवाल ने जारी किया वीडियो आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ लाखन पोसवाल ने एक वीडियो जारी कर लोगों से अपील करते हुए कुछ प्रश्नों के जवाब दिए हैं। - होम आइसोलेशन या क्वारेंटाइन करने का क्या कारण है, इस पर उन्होंने कहा कि जिन्होंने संक्रमित देशों से आने वाले व्यक्तियों में उस देश को छोडऩे के 14 दिन तक संक्रमण होने की संभावना रहती है, ऐसे में यदि उन्हें ये संक्रमण किसी कारण से हुआ है तो वह दूसरे लोगों में नहीं फैले इसके लिए वह स्वयं को घर में रखे, मास्क पहने, दूसरों से दूरी रखे, छींकने व खांसने के समय रूमाल व पेपर रखे। इनमें स े ज्यादातर स्वस्थ रहते हैं, इसलिए उन्हें अलग थलग रखना रास नहीं आता, लेकिन कुछ लोगों में बीमारी के लक्षण खांसी व बुखार सामने आ सकते है, या गले में दर्द है या श्वास लेने में परेशानी हो तो इसकी सूचना तत्काल नियंत्रण कक्ष पर दी जा सकती है या हॉस्पिटल के विशेष आउटडोर में जांच करवाई जा सकेगी।

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- हॉस्पिटल आइसोलेशन उनका किया जाता है, जिनमें संक्रमण है, भले ही उनमें बीमारी के लक्षण नहीं हो। यदि कोई पॉजिटिव आता है तो उसे तब तक रखा जाता है, जब तक वह ठीक नहीं हो। उसकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने पर दो बार जांच करवाई जाती है, यदि दोनों बार जांच में नेगेटिव आ जाता है, तो उसे दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर देते हैं।

- यदि कही से कोई संक्रमित हुआ है तो उसका भी उपचार किया जाता है, उन्होंने मरीजों व परिजनों से अपील की है, कि वह अब तक जो संयम बनाए हुए हैं ऐसा ही बनाकर रखे व घर पर सुरक्षित रखे, प्रशासन व चिकित्सा विभाग का सहयोग करें, नियमों का पालन करें, जैसे बार-बार हाथ धोने व सफाई का ध्यान रखें।

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bhuvanesh pandya Reporting
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