अब चीनी नहीं, मेड इन इंडिया ही होगी प्राथमिकता

चीनी सामान के बहिष्कार का शहर के व्यापारियों ने भी बनाया मन

By: madhulika singh

Updated: 22 Jun 2020, 06:27 PM IST

उदयपुर. चीनी वस्तुएं के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाओ की बात पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना वायरस को दुनिया भर में फैलाने और हाल ही लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद तो जैसे भारतीयों के मन में गुस्सा भर चुका है। ऐसे में चीनी सामान के बहिष्कार की लहर अब देश के हर शहर व गांवों तक पहुंचने लगी है। उदयपुर की बात करें तो यहां व्यापारी भी अब चीनी सामान के बहिष्कार का मन बना चुके हैं। उनका कहना है कि चीनी सामान ने पूरे मार्केट पर कब्जा कर रखा है। हालांकि पूरी तरह से बहिष्कार में समय लगेगा लेकिन शुरुआत कर देनी चाहिए। व्यापारियों ने अब किसी भी तरह का चीनी माल का नया स्टॉक नहीं खरीदने की बात कही है।

ग्राहक पूछते हैं, कहीं ये उत्पाद चीनी तो नहीं
उदयपुर के व्यापारियों का कहना है कि चीनी उत्पादों ने भारतीय बाजार में पूरी तरह घुसपैठ कर रखी है। 60 प्रतिशत तक बाजार पर इसका कब्जा है। ऐसे में इतनी जल्दी इसको मार्केट से निकालना संभव नहीं है क्योंकि अभी कई सारे व्यापारियों के पास स्टॉक है। लेकिन अब ये तय किया जा रहा है कि कोई भी नया माल नहीं खरीदा जाएगा। मेड इन इंडिया और स्थानीय चीजों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, चीनी सामान के बहिष्कार का असर दिखने लगा है। लोग अब कुछ खरीदने से पहले पूछते जरूर हैं कि कहीं ये चीनी तो नहीं है? वहीं, मोबाइल में भी वे अब चीनी कंपनियों से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में ग्राहकों की संतुष्टि और उनकी मांग को देखते हुए भी अब भारतीय उत्पादों को तवज्जो दी जाएगी।


चीन में बनी इन चीजों का होता है ज्यादा इस्तेमाल

रोज की जरूरत की चीजों के अलावा त्योहार भी इन्हीं सामानों के साथ मनाए जाते हैं। होली पर रंग और पिचकारियों से लेकर दीपावली में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और सजावटी झालरों तक बहुत कुछ चीन से ही आता है। चीन से बड़ी मात्रा में फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, मोबाइल, एसेसरीज, खिलौने, क्रॉकरी आदि करीब तीन हजार तरह के सामान चीन से आते हैं।


इनका कहना है

इस संबंध में हम जल्द ही बैठक करेंगे और चाइनीज उत्पाद ना खरीदने व ना बेचने की व्यापारियों को शपथ दिलाएंगे। इसकी सूचना व्यापार संघ की ओर से हर दुकान पर स्टीकर्स लगाकर देंगे। दिल्ली से पहले मेरे पास भी चाइनीज स्टॉक आता था लेकिन अब नया स्टॉक नहीं खरीदा है। हम भी देश के सिपाही हैं और देश का हित सर्वोपरि है।
जयेश चंपावत, अध्यक्ष, अश्विनी बाजार व्यापार संघ


हम अपने देश को सबसे ऊपर रखते हैं। लेकिन अभी इस वक्त कई क्षेत्र हैं जहां चीन का एकछत्र राज है। अभी इन उत्पादों का विकल्प मिलना चाहिए और जो स्टॉक है वो खत्म करना होगा ताकि नया स्टॉक नहीं खरीदा जाए। सरकारी नीतियां भी व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए बने। हमने हमेशा से लोकल ब्रांड्स को ही प्रमोट किया है और आगे भी करेंगे।

जय मोटवानी, अध्यक्ष, बापू बाजार व्यापारी संघ

जो स्टॉक है, उसका नुकसान कोई नहीं करना चाहता लेकिन आगे से चीनी माल नहीं खरीदा जाएगा। चीन के उत्पाद को नहीं बेचने के लिए व्यापारियों को प्रेरित करेंगे। मार्केट से सप्लाई कम हो जाएगी तो केवल लोकल और ब्रांडेड चीजें ही रह जाएंगी। इसके लिए कदम उठाना ही होगा।
विश्वेंद्र सिंह, अध्यक्ष, बापू बाजार व्यापार मंडल

मोबाइल की बात की जाए तो चीनी कंपनियां एक तरह से हावी है लेकिन इसकी शुरुआत हमें खुद से ही करनी होगी। मैं अपनी बात करूं तो चीनी से ज्यादा दूसरी कंपनियों को महत्व देता हूं। कई बार ग्राहक भी चीनी कंपनियों के उत्पाद की डिमांड करते हैं लेकिन अब लोग भी जागरूक होने लगे हैं। कई लोग अब पूछने लगे हैं कि ये मेड इन चाइना है तो इसके बजाय कुछ और दिखाइए।
पुष्पेंद्र जैन, अध्यक्ष, मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन

madhulika singh Reporting
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