अब घरों के बाहर नेम प्लेट के साथ दिख रहे नो मास्क, नो एंट्री के पर्चे

कोरोना से बचाव के लिए जागरूक लोगों ने घरों के बाहर चस्पा किए नियम, घर में आने वाले मेहमानों को मास्क के बिना नहीं दिया जाता प्रवेश

By: madhulika singh

Updated: 06 Oct 2020, 09:55 PM IST

उदयपुर. भारतीय परंपरा में हमेशा से मेहमान को भगवान के रूप में देखा जाता है और उनके लिए घर के द्वार हमेशा खुले रहते हैं, लेकिन कोरोना काल में अब मेहमानों के लिए घर के द्वार तब ही खुलेंगे जब उन्होंने मास्क पहने होंगे। जागरूकता की ये नजीर पेश की है उदयपुर के ही निवासियों ने। शहर के लोगों के घरों के बाहर भी अब नेम प्लेट के साथ ‘नो मास्क, नो एंट्री’ के पर्चे और बोर्ड दिखने शुरू हो चुके हैं ताकि घर में भी मास्क वालों को ही प्रवेश मिले। एक ओर जहां सरकार ने कोरोना के विरुद्ध जन आंदोलन शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर लोग भी अब इस आंदोलन का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं। अभी केवल दुकानों, संस्थाओं, कार्यालयों व सार्वजनिक स्थलों व पर्यटन स्थलों पर ही ये बोर्ड नजर आने लगे हैं लेकिन शायद अब ऐसे नजारे जल्द ही घर-घर के बाहर भी देखे जा सकेंगे।

घर के बाहर नो मास्क का पर्चा, गेट पर ताला और सेनेटाइजर की बोतल भी
शहर के नाइयों की तलाई स्थित एक मकान के बाहर घर के दरवाजे पर ताला दिखाई देगा तो वहीं घर के बाहर ‘नो मास्क, नो एंट्री’ का पर्चा भी चस्पा किया गया है ताकि लोग घर में बिना मास्क के प्रवेश नहीं करें। ये घर है सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता कृष्णचंद्र श्रीमाली का। श्रीमाली 84 वर्ष के हैं और ना केवल वे खुद बल्कि पूरे घर के सदस्यों को नियमों का पालन कराते हैं। वे बताते हैं कि जो सदस्य घर के बाहर जाता है वह आकर सबसे पहले गर्म पानी से स्नान करता हैं, उसके बाद ही दूसरे काम करते हैं। घर के दरवाजे पर ताला लगाए रखते हैं ताकि कोई भी अनावश्यक प्रवेश नहीं करे और ‘नो मास्क, नो एंट्री’ का पर्चा लगा रखा है। गेट पर सेनेटाइजर भी रखा है। घर में 5 सदस्य हैं और सभी मास्क लगाने से लेकर हाथ सेनेटाइज करने का नियम पालन करते हैं। वहीं, लोगों को भी इस बारे में जागरूक करते हैं। लोग हालांकि अब भी इसकी गंभीरता नहीं समझते। इसे हंसी-मजाक में लेते हैं। लेकिन, कोरोना के कारण जिन्होंने अपने खोए हैं वे लोग शायद इसका दर्द अच्छे से समझ पाते होंगे।

home.jpg

कोरोना ने बदल दी परंपराएं

कोरोना ने ना केवल शारीरिक, आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी कई हद तक प्रभावित किया है। यही कारण है कि अब नेम प्लेट की ही तरह लोग घरों के बाहर ‘नो मास्क, नो एंट्री’को लगाना जरूरी समझने लगे हैं। कोरोना केवल घर के बाहर जाने वालों के लिए ही खतरनाक नहीं है बल्कि घरों में रहने वालों के लिए भी जानलेवा हो सकता है। यदि कोई वायरस लेकर घर में प्रवेश कर जाए। ऐसे में घरों के बाहर भी ‘नो मास्क, नो एंट्री’ के बोर्ड अवश्यंभावी हो गए हैं। श्रीमाली की तरह ही शहर के कई अन्य लोग भी जागरूक हैं और मास्क, सेनेटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व बखूबी समझते हैं। ये जागरूकता तब ही आ सकती है जब लोग कोरोना को गंभीरता से लेंगे। सरकार की ओर से ‘नो मास्क, नो एंट्री’ के जन जागरूकता अभियान चलाया में भी भागीदारी करेंगे।

Corona virus
madhulika singh Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned