अब सौर ज्वालाओं व तूफानों की हो सकेगी भविष्यवाणी

उदयपुर के सौर वैज्ञानिक डॉ. लोकेश भारती के सौर कलंकों के अध्ययन में सामने आई बात, पूर्व जानकारी के आधार पर संचार व विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा के उपाय किए जा सकेंगे,

By: madhulika singh

Updated: 18 Feb 2020, 08:40 PM IST

मधुलिका स‍िंंह/उदयपुर. अब सौर ज्वालाओं व सौर तूफानों की भी भविष्यवाणी की जा सकेगी। ये भविष्यवाणी संचार सेवाओं व विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा के लिए कारगर साबित होगी। उदयपुर के सौर भौतिक वैज्ञानिक डॉ. लोकेश भारती वास्तविक व कम्प्यूटर जनित सौर कलंकों की सूक्ष्म संरचनाओं व गुणों का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं। ये अध्ययन सौर ज्वालाओं व सौर तूफानों की भविष्यवाणी में सहायक हैं।

डॉ. भारती ने बताया कि उच्च क्षमता के सौर दूरबीनों से प्राप्त सौर कलंकों के विषय में प्राप्त जानकारी व सौर भौतिकी के सिद्धांतों की सहायता से दस वर्षों में वैज्ञानिकों ने उच्च क्षमता के कम्प्यूटर की सहायता से सौर कलंक बनाने में सफलता प्राप्त की है। पहली सफलता अमरीका के बोल्डर शहर में स्थित हाई एल्टीट्यूड ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक डॉ. मेटियास रेम्पल के दल ने प्राप्त की, जिसमें पूर्ण सौर कलंक बनाया गया। इसके लिए दस लाख कम्प्यूटर प्रोसेसर का उपयोग किया गया । कम्प्यूटर जनित सौर कलंक में विस्तृत सूचनाएं निहित होती है, जो वास्तविक सौर कलंक में सौर दूरदर्शी व उपकरणों की नियत क्षमता के कारण प्राप्त नहीं हो सकती। उदाहरण के तौर पर जहां कम्प्यूटर जनित सौर कलंक से 12 किमी तक की सूर्य के सतह की सूचना प्राप्त हो सकती है वहीं वर्तमान में उपलब्ध सौर दूरदर्शियों से लगभग 72 किमी तक ही सूर्य की सतह को देखा जा सकता है । साथ ही इन कम्प्यूटर जनित सौर कलंकों की संरचना व गुणों का वास्तविक सौर कलंकों से मिलान होना भी आवश्यक है। इस प्रकार का अध्ययन सौर भौतिकी की उन धारणाओं की पुष्टि करता है जिनके आधार पर कम्प्यूटर से सौर कलंक बनाया गया । इस प्रकार के तुलनात्मक अध्ययन पर डॉ. भारती का एक शोधपत्र अमरीका के एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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इसलिए हो रहा अध्ययन

डॉ. भारती ने बताया कि हमारी पृथ्वी व सूर्य के बीच का वातावरण सूर्य पर उत्पन्न सौर ज्वाला व उससे उत्पन्न सौर तूफानों से प्रभावित होता है। सूर्य से पृथ्वी की ओर बढ़ता सौर तूफान हमारे संचार उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे मोबाईल नेटवर्क, वायु यातायात व नेविगेशन सिस्टम प्रभावित होगा । तीव्र/प्रचंड सौर तूफान हमारी विद्युत व्यवस्था (पॉवर ग्रिड) को भी हानि पहुंचा सकता है। सौर ज्वाला सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन से उत्पन्न होती है इसलिए इस प्रकार के अध्ययन सूर्य के चुम्बकीय संरचना को समझने में सहायक होंगे, जिसकी सहायता से सौर ज्वाला व तूफानों की भविष्यवाणी की जा सके और इस पूर्व जानकारी के आधार पर संचार व विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा के उपाय किए जा सके।

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