गुजरात बॉर्डर पर कट रहा ऑनलाइन फर्जी आरटीओ टैक्स, दो गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक ने जांच कराई तो अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

By: jagdish paraliya

Published: 06 Oct 2021, 03:39 PM IST

परसाद/सलूम्बर (उदयपुर). गुजरात बॉर्डर पर ऑनलाइन फर्जी आरटीओ टैक्स काटने के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए परसाद थाना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बड़ी बात ये कि सवा साल पहले इसी केस में गलत अनुंसधान होने पर एफआर लगा दी गई और प्रार्थी के खिलाफ गुजरात में केस दर्ज हो गया था। लिहाजा प्रार्थी को तीन महीने जेल रहना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने दुबारा जांच के आदेश दिए तो गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस ने बताया कि आरोपी गढ़ी पटी थाना होड़ल पलवल हरियाणा निवासी राहुल पुत्र प्रिथी नाथ और भूलवाना होडल पलवल हरियाणा निवासी हर्ष उर्फ हरिराम पुत्र राजवीर नाथ को गिरफ्तार किया। आरोपी तीन-चार साल से राजस्थान-गुजरात-उत्तरप्रदेश-हरियाणा बॉर्डर पर वाहनों के ऑनलाइन टैक्स के नाम से आरटीओ की फर्जी टैक्स रसीदें काट रहे थे। 15 मार्च, 2020 को विजयलक्ष्मी ट्रैवल्स के मालिक बस्सी निवासी हमेर सिंह पुत्र पदम सिंह राजपूत ने परसाद थाने में केस दर्ज करवाया था। इसमें बताया कि 1 मार्च, 2020 को परसाद स्थित देव आसिंद होटल पर गुजरात आरटीओ का ऑनलाइन टैक्स 42 हजार 200 रुपए जमा करवाया, लेकिन ऑनलाइन टैक्स जमा करने वाले गिरोह ने गुजरात का ऑनलाइन टैक्स जमा नहीं किया, जबकि फर्जी रसीद दे दी। आखिर टैक्स जमा नहीं होने से गुजरात आरटीओ ने बस को जब्त कर लिया। वाहन मालिक ने परसाद थाने में फर्जी टैक्स रसदी का मामला दर्ज करवाया तो गुजरात आरटीओ ने जब्त बस छोड़ी।

ऐसे कर रहे थे फर्जीवाड़ा
गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में बताया कि मोबाइल से गूगल साइट पर जाकर ऑनलाइन आरटीओ टैक्स पर परिवहन चेक पोस्ट 150 में जाने पर बॉर्डर टैक्स कलेक्शन का ऑप्शन आता है, इसमें जिस राज्य का टैक्स काटना है, उस पर क्लिक करने पर व्हीकल अंदर स्टेट टैक्स की साइट खुलती है। प्रोफार्म पर जिस वाहन का टैक्स काटना हो, उसके रजिस्ट्रेशन नंबर भरकर उसकी पूरी जानकारी आने से टैक्स संबंधी जानकारी मिल जाती। वाहन डॉट कॉम की साइट पर जाकर रसीद निकाल देते। राशि आरटीओ के अकाउंट में ना जाकर आरोपियों के जेब में ही रह जाती। आरोपी कुछ दिन रसीदें काटकर लोकेशन बदल देते।

पत्रिका ने बताई हकीकत
पूरे घटनाक्रम की जानकारी 22 जुलाई, 2021 को राजस्थान पत्रिका के माध्यम से पुलिस अधीक्षक राजीव पचार के पास पहुंची। उन्होंने थानाधिकारी रमेशचंद्र को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए पुन: जांच के आदेश दिए। टीम ने गिरोह का पर्दाफाश किया।
जेल में रहा ड्राइवर
थाने में फर्जी टैक्स के दर्ज मुकदमे की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने मामले को झूठा करार देते हुए एफ आर लगाकर पर्दा डाल दिया। इस पर गुजरात आईटीओ ने बस मालिक को षड्यंत्र का आरोपी मानते हुए गुजरात के प्रांतीज थाने में केस दर्ज कर दिया। आखिर बस चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ड्राइवर वाग सिंह पुत्र अनोप सिंह राजपूत साढ़े तीन माह तक गुजरात जेल में रहा।

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