35 गांवों के बीच एक कृ षि पर्यवेक्षक

खरीफ की सीजन में 2082 हैक्टेयर, रबी की सीजन में 1352 हैक्टेयर में खेती करते हैं किसान
दोनों पंचायतों का 3850 हैक्टेयर भौगोलिक क्षेत्रफल

By: surendra rao

Updated: 06 Jan 2021, 06:38 PM IST

लूणदा. (उदयपुर). लूणदा कस्बे सहित आसपास के किसानों के लिए खेती के लिए जानकारियों का अभाव है। कुल आबादी में से 90 प्रतिशत से अधिक जनता कृषि से संबंधित कार्य कर अपना जीवन यापन कर रही है, मगर बिना कृषि पर्यवेक्षक के न तो योजनाओं का लाभ मिल रहा है और न जानकारी मिल रही है। यहां पर किसानों को हाइटेक तरीके से होने वाली खेती की जानकारी मिलने नहीं मिलने से हमेशा किसानों परंपरागत खेती ही कर रहे हैं। किसान बागवानी खेती भी कर सकते हैं लेकिन जानकारी नहीं है। लंबे समय से खाली चल रहे पद को भरने के लिए न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कोई रूचि दिखाई और ना ही अधिकारियों ने इस तरफ कोई ध्यान दिया।
नहीं मिलता उन्नत तकनीकी का ज्ञान
विभाग की ओर से भले ही किसानों को उन्नत तकनीकी वैज्ञानिक विधि से खेती करने की सलाह दी जा रही है मगर पद रिक्त होने से किसानों तक उन्नत तकनीकी वैज्ञानिक विधि से खेती की विधि का प्रसार प्रचार नहीं हो पाता है।
अफीम किसान होते प्रभावित :
लूणदा व इसके आस-पास के ़क्षेत्रों में करीब 250 से अधिक पट्धारी अफीम किसान खेती कर रहे हैं। किसानों को मौसम की मार व रोग लगने का डर भी हमेशा सताता रहता है क्योंकि पट्टा नहीं कटे। वहीं लूणदा क्षेत्र में खरीफ की सीजन में इन सभी फसलों को मिलाकर 1284 हैक्टयर पर कृषि कार्य किया जाता है। अमरपुरा जागीर में 798 हैक्टेयर पर कृषि कार्य किया जाता है।

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surendra rao Desk
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