ये उल्लू दिन में भी करता है शिकार, खतरे में खड़े हो जाते कान...

र्ड विलेज मेनार के धण्ड तालाब के समीपवर्ती इलाके में शॉर्ट इयर्ड आउल (छुटकन्ना उल्लू) को भी देखा जा सकता है। हालांकि ये आसानी से नजर नहीं आता है। ये उल्लू शीत ऋतु में प्रवास के लिए भारत आता है। यह अन्य प्रजातियों के उल्लुओं से अलग है।

By: Krishna

Published: 06 Jan 2020, 07:38 PM IST

उमेश मेनारिया/मेनार . बर्ड विलेज मेनार के धण्ड तालाब के समीपवर्ती इलाके में शॉर्ट इयर्ड आउल (छुटकन्ना उल्लू) को भी देखा जा सकता है। हालांकि ये आसानी से नजर नहीं आता है। ये उल्लू शीत ऋतु में प्रवास के लिए भारत आता है। यह अन्य प्रजातियों के उल्लुओं से अलग है। दूसरी प्रजातियों के उल्लू रात में सक्रिय रहते है, जबकि शॉर्ट इयर्ड आउल दिन में देख सकता है, जिससे शिकार कर पाता है। देवेंद्र श्रीमाली ने बताया कि ये ज्यादातर सर्दियों के दौरान अक्टूबर से अप्रैल तक देश के खुले मैदानों में दिखता है।मध्यम आकार का उल्लू, जिसके सिर पर पंख के गुच्छे होते हैं, जो स्तनधारी प्राणियों के कान की तरह दिखते हैं। इसे कोई भय होता है तो बचाव में कान खड़े करता है, अन्यथा इसके कान नहीं दिखते है। इसका सिर बड़ा, गर्दन छोटी, पंख बड़े, आखें बड़ी व पीले रंग की चोंच, छोटी मजबूत व काले रंग की होती है और रंग पीला भूरा होता है। इसका रंग जमीन, घास तथा अन्य वनस्पति से मेल खाता है। आसानी से जमीन पर देख पाना मुश्किल है। मादा पक्षी आकार में नर से बड़ी होती है। इसका मुख्य भोजन खेतों व खुले घास के मैदानों में पाए जाने वाले चूहे होते हैं।वन्यजीव विशेषज्ञ सतीश शर्मा ने बताया कि मेनार में सर्दियों में दिखने वाला उल्लू ट्रांस हिमालया के उस पार से आता है। ये दुर्लभ प्रजाति का उल्लू है, जो बहुत कम दिखाई देता है। यह शाम और दिन में भी घास के मैदानों, झाडिय़ों में छोटी व नीची उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है।

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