रमाकांत कटारा/उदयपुर. ‘कर्नल जेम्स टॉड स्वयं प्राकृत, अरबी, फारसी आदि भाषाओं का जानकार नहीं था। अनुवाद के लिए उसको दूसरे लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था। अनुवाद की त्रुटियों को टॉड अपने लेखन से दूर नहीं कर पाया। मल्लिक मोहम्मद जायसी की कृति पद्मावत का ऐतिहासिक दृष्टि से कोई सरोकार नहीं है, यह काल्पनिक साहित्य रचना है, जिसे टॉड ने ऐतिहासिक मान कर अपने लेखन में शामिल कर लिया।’ टॉड के लेखन के संदर्भ में यह लिखा है प्रमुख इतिहासकार डॉ. प्रकाश व्यास और डॉ. केआर. शर्मा ने।



 

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