पैंथर के लिए कुंभलगढ़, बस्सी व सीतामाता ही मुफीद, इन क्षेत्रों में पिछले वर्षों के मुकाबले बढ़े पैंथर

-मेवाड़ में पैंथर संरक्षण को लेकर बरसों से चर्चा के बावजूद सरकार अब तक कोई प्रोजेक्ट नहीं ला सकी है जिससे अधिकतर क्षेत्रों में इनकी संख्या घटी या स्थि

By: Dhirendra Kumar Joshi

Published: 09 Dec 2017, 09:11 AM IST

मुकेश हिंगड़/ उदयपुर . मेवाड़ में पैंथर संरक्षण को लेकर बरसों से चर्चा के बावजूद सरकार अब तक कोई प्रोजेक्ट नहीं ला सकी है जिससे अधिकतर क्षेत्रों में इनकी संख्या घटी या स्थिर है। इसके बावजूद हमारे कुंभलगढ़, सीतामाता अभयारण्य, बस्सी और उदयपुर के वन मंडल उत्तर के जंगल व अभयारण्यों से यह अच्छी खबर है ।

 

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वन्यजीव गणनाओं के तुलना में वहां पैंथर की तादाद बढ़ी है। क्षेत्र में ये ही वे संरक्षित वन क्षेत्र हैं, जहां आबादी का विस्तार अपेक्षाकृत कम होने से जैव विविधता बची है। अन्य क्षेत्रों में आबादी विस्तार, मानवीय गतिविधियां बढऩे एवं यातायात के साधन बढऩे से वन्यजीवों की संख्या में कमी आ रही है।

 

ऐसे होती है वन्यजीव गणना

वर्ष में एक बार मई में बुद्ध पूर्णिमा पर वन्यजीव गणना होती है जिसमें वन क्षेत्रों में स्थित जलस्रोतों पर वनकर्मी तैनात किए जाते हैं। वे एक दिन (24 घंटे) में वहां आने वाले पैंथरों व अन्य वन्यजीवों को गिने जाते हैं।

 

कुंभलगढ़ इसलिए आबाद
कुम्भलगढ़ क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से अत्यधिक समृद्घ है। वहां पर पैंथर, भालू, जंगली सूअर, चीतल, सांभर, चिंकारा, भेडिय़े, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, सियार एवं चौसिंगा के अलावा सरिसृप और विविध प्रकार के पक्षी काफी संख्या में है। वहां पर पैंथरों की संख्या वैसे भी 80 से ज्यादा ही गणना में आती रही है।

 

आबादी में बहुत आए पैंथर
वैसे इस वर्ष के मुकाबले बीते वर्षों में पैंथर्स की आबादी क्षेत्र में आने की घटनाएं ज्यादा हुई थी। सर्वाधिक मामले उदयपुर व राजसमंद जिले में हुए और वे भी जंगल से सटे आबादी क्षेत्रों में। वैसे उदयपुर शहरी क्षेत्र में भी पैंथर के आबादी क्षेत्र में आने की घटनाएं हुई मगर उनका इंसान से संघर्ष नहीं हुआ। शहर के राजीव गांधी उद्यान, सुविवि कैम्पस, चित्रकूटनगर, दूधतलाई के पास, ढीकली क्षेत्र में पैंथर आ गया था जिससे लोग परेशान हो गए थे।

 

यूं गड़बड़ा सकते हैं आंकड़े

- एक ही पैंथर दो बार पानी पीने आ सकता है। ऐसे में उसकी दो बार गणना हो सकती है।

- एक ही पैंथर दो अलग-अलग जगहों पर पानी पी सकता है। ऐसे में भी दोहराव हो सकता है।

- कई बार अच्छी बारिश होने से जंगलों व अभयारण्यों में कई जगहों पर थोड़ा-बहुत पानी जमा हो जाता है, मगर सभी जगह वनकर्मी तैनात नहीं होते। ऐसे में वहां पानी पीने आने वाले पैंथर की गणना नहीं हो पाती है।

- कोई पैंथर गणना के दिन किसी अन्य स्थान या इंसान के रहने वाले क्षेत्र में पानी पी लेता है तो वह उन जलस्रोतों पर नहीं जाता है।

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Dhirendra Kumar Joshi Reporting
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