पयुर्षण पर्व के आयोजनों में उमड़ा जैन समाज

पयुर्षण पर्व के आयोजनों में उमड़ा जैन समाज

Sushil Kumar Singh Chauhan | Publish: Sep, 25 2018 08:33:39 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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उदयपुर. हुमड़ भवन में पर्यूषण महापर्व के चारित्र शुद्धि विधान का समापन सोमवार को विश्वशांति महायज्ञ के साथ हुआ। इसमें ५०१ जोड़ों ने हिस्सा लिया। आचार्य अखलेश शास्त्री के सान्निध्य में धार्मिक आयोजन हुए। मंगलवार को सामूहिक क्षमावाणी व तपस्वी सम्मान होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि धर्मभूषण ने कहा कि महापर्व में श्रावकों ने धर्म आराधना कर पुण्यलाभ कमाया।

प्रकृति से शाकाहारी है मनुष्य

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर लकड़वास में दस लक्षण महापर्व के समापन पर क्षमावाणी के दिन अखिल भारतीय जैन युवा फैडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने अहिंसा शाकाहार वर्तमान परिपेक्ष्य विषय पर व्याख्यान दिए। शास्त्री ने कहा कि दूध व घी की उत्पादन क्षमता वाले देश में भगवान राम, महावीर, गोपाल प्रभु ने जन्म लिया है। ये देश की प्रकृति शाकाहारी है। इधर, आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से समापन के मौके पर शोभायात्रा का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में समाजजनों ने उपस्थिति दर्ज कराई।

दृष्टाभाव से झगड़े स्वत: खत्म
महाप्रज्ञ विहार में आचार्य शिवमुनि ने धर्मसभा में कहा कि मानव मात्र में कोई भेद नहीं है। यह भगवान महावीर ने हमें सिखाया है। यह महावीर के दृष्टाभाव थे, अगर यही दृष्टाभाव हर मनुष्य में आ जाए तो इस जगत के कई सारे झगड़े तो स्वत: ही समाप्त हो जाएंगे।
युवाचार्यश्री महेन्द्र ऋषि ने कहा कि जीवन में सत्य की राह को कभी मत छोड़़ो। जहां पर सत्य है वहां पर परमात्मा है। सत्य ही ईश्वर है।

वास्तविक सुख आत्म रमणता
आयड़ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में ऋषभ भवन में मुनि प्रेमचंद ने कहा कि धर्म वर्तन का विषय है। आचरण में उतारने की वस्तु है। मात्र बोलने या लिखने की वस्तु न होकर, अनुभूति की विषय वस्तु है। विकट परिस्थिति आने पर शान्ति-समाधि, आत्म अनुभव से ही आएगी। दूसरा कोई ईलाज है ही नहीं। वास्तविक सुख तो आत्म रमणता ही है।

सत्संग व प्रार्थना सशक्त माध्यम
जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में आयड़ तीर्थ में आचार्य यशोभद्र सूरिश्वर ने कहा कि हमारा मन तिजोरी के समान है। हमने मन को कचरा पेटी बना रखा है, जिसमें हम विषय, विकार व कषायों का कचरा भर देते हैं। मन को कचरा पेटी नहीं तिजोरी बनाएं। इसलिए ज्ञानी यत्र तत्र सर्वत्र पूजे जाते हैं।

आत्मा को पवित्र बनाएं
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में आराधना भवन में पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने कहा कि समझदार समग्र पवित्रता को लक्ष्य बनाकर जीता है। इसीलिए वो सत्य आचरण करके मन को पवित्र रखता है। सत्य के अलावा मन को पवित्र रखने की कोई अन्य वस्तु भी नहीं है।

सांसारिक चीजों में शर्त सुख
मुनि शास्त्रतिलक विजय ने कहा कि संसार की चीजों मे कन्डीशनली सुख है। भोजन भले ही स्वादिष्ट हो, लेकिन प्रेम से दिया जाए तो ही सुख देगा। हिरणमगरी सेक्टर ४ स्थित शांतिनाथ जिनालय में आयोजित धर्म सभा में मुनि ने कहा कि खुद का बंगला बड़ा होने के बाद भी पड़ौसी का बड़ा बंगला देखकर मनुष्य का सुख गायब हो जाता है।

सामूहिक क्षमापना पर्व
ओसवाल महिला मंच (ओसवाल सभा) की ओर से आयड़ जैन मंदिर में सामूहिक क्षमापना, चौवीसी व अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। सचिव माया सिरोया ने बताया कि उपवास करने वाली प्रवीणा पोखरना, रेणु जैन, वंदना जैन, अनिता सिरोया, पवन बेन एवं अन्य का अभिनंदन किया गया

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