रोग से बड़ा झोली में अस्पताल पहुंचने का दर्द

रोग से बड़ा झोली में अस्पताल पहुंचने का दर्द

pankaj vaishnav | Publish: Sep, 06 2018 01:52:31 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

विकास से दूर है सराड़ा का झालरदेवी गांव : नाले का पानी पीने की मजबूरी, सड़क निर्माण में जंगलात का रोड़ा

गौतम पटेल . सराड़ा . देश डिजिटल इंडिया बन रहा है, लेकिन उदयपुर जिले के आदिवासी क्षेत्र आज भी सड़क, बिजली, पानी की समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि जंगल में बसे गांवों से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 5 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। बिमारों, प्रसूताओं को झोली में डालकर अस्पताल पहुंचाया जाता है। अभी तक मुख्य सड़क से आबादी तक सड़क निर्माण में वन विभाग का रोड़ा रहा। सरकारों ने वादे किए, लेकिन हालात में सुधार लाने में किसी ने पहल नहीं की।
ये हालात हैं सराड़ा उपखण्ड के नठारा ग्राम पंचायत के झालरदेवी और खोड़ी महुड़ी गांव के। इन गांवों की आबादी करीब एक हजार है, लेकिन यहां के लोग सुविधाओं के अभाव में आदिमानव जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। किसी के अस्वस्थ होने, प्रसूताओं को अस्पताल पहुंचाने पर पूरा परिवार जुट जाता है। पीडि़त को झोली में डालकर पांच किलोमीटर उबड़-खाबड़ रास्तों से ले जाया जाता है। प्रसव पीड़ा अधिक होने और जहरीले जीव के काटने पर जान बच पाना ही मुश्किल हो जाता है।

पीते हैं नाले का पानी
झालरदेवी और खोड़ी महुड़ी गांवों तक कभी सड़क नहीं बनी। ऐसे में सुविधाएं भी नहीं पहुंच पाई। ऐसे में गांवों में हैण्डपम्प, नलकूप जैसी सुविधा भी नहीं है। ऐसे में ग्रामीण नदी-नालों, खुले कुओं का पानी पीने को मजबूर है। गांव में पीने को शुद्ध जल की व्यवस्था नहीं है। बरसात के दौरान नदी-नालों में जमा पानी ही प्यास बुझाने के काम आता है। हालात गर्मियों में बदतर हो जाते हैं, जब लोगों को दो-तीन किलोमीटर दूर से पेयजल बंदोबस्त करना पड़ता है।

होती रही वादा खिलाफी
झालरदेवी और खोड़ी महुड़ी गांव के लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान गांवों में जनप्रतिनिधियों की आवाजाही रहती है, लेकिन चुनाव के बाद कोई मुड़कर नहीं देखता। हर बार चुनाव में सड़क मार्ग का वादा किया जाता है। सरकारें बदलती रही, लेकिन किसी ने सड़क पहुंचाने का वादा पूरा नहीं किया।

शिक्षा भी सीमित
गांव में आबादी करीब एक हजार है। यहां दो सरकारी प्राथमिक विद्यालय भी है। इससे आगे की शिक्षा के लिए १०-१२ किलोमीटर दूर चावण्ड, सराड़ा व परसाद जाना पड़ता है। सुगम मार्ग के अभाव में यहां के बच्चे प्राथमिक शिक्षा से आगे की पढ़ाई ही नहीं कर पाते।

इनका कहना...
पहले गांव तक पहुंचने का मार्ग ही नहीं था। हमने सरकार में रहते पगडण्डी रास्ता बनवाया। इसके बाद प्रयास जारी थे, लेकिन सरकार बदल गई। वर्तमान सरकार ने सड़क समस्या हल करने की बात कही, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
रघुवीर मीणा, पूर्व सांसद, उदयपुर


हमारा प्रयास है कि झालरदेवी तक पक्की सड़क बने। इसको लेकर कई बार विधानसभा में मुद्दा उठाया। अभी फाइल जिला प्रशासन के पास है। वन विभाग की ओर से स्वीकृति नहीं मिलने से समस्या आ रही है।
अमृतलाल मीणा, विधायक, सलूंबर

झालरदेवी के लिए महानरेगा योजना के तहत स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा, लेकिन डामरीकरण की स्वीकृति राज्य सरकार से नहीं मिल पाई है।
शान्तिलाल खटीक, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी सलूंबर

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