दूसरे जिलों के मरीज बिना प्रोटोकॉल पालन के उदयपुर रैफर, यहां भटक रहे मरीज

- जनप्रतिनिधि और नेता बनाते हैं भर्ती करने का दबाव

By: bhuvanesh pandya

Updated: 06 May 2021, 09:39 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. शहर के बड़े चिकित्सालयों में ऑक्सीजन से लेकर आईसीयू विथ वेंटिलेटर व आईसीयू विदाउट वेंटिलेटर की भारी कमी के बीच एक नई परेशानी फिर सामने आ रही है। समीपस्थ जिलों से वहां के चिकित्सक यहां बिना किसी चिकित्सक या विभागाध्यक्ष से बातचीत किए या बगैर कोरोना प्रोटोकॉल के पालन के मरीजों को बड़ी संख्या में रैफर कर रहे हैं। ऐसे में हालात विकट बनते जा रहे हैं।

-----
ऐसे आ रहे है मरीज

- बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमन्द, चित्तौडगढ़़, सिरोही, प्रतापगढ़ से मरीजों को उदयपुर रैफर किया जा रहा है, ऐसे में यहां रैफर की पूरी प्रक्रिया पहले से नहीं अपनाने के कारण ना तो पलंग मिलता है और ना ही समय पर इन मरीजों का उपचार शुरू हो पाता है। ऐसे में कई बार गंभीर मरीजों के परिजनों के लिए बड़ी परेशानी होने लगी है।
- यहां रैफर कर वे मरीज भी भेजे जा रहे हैंं जिन्हें ज्यादा परेशानी ही नहीं, एम्बुलेंस व अन्य व्यवस्थाओं का अकारण खर्च उठाना पड़ रहा है। यदि चिकित्सक स्वयं काउंसलिंग करे तो समस्या हल हो सकती है।

- प्रतिदिन करीब 50 से 70 मरीज इन जिलों से रैफ र कर उदयपुर भेजे जा रहे हैं, एक तो पलंगों की मारामारी और बिना पूर्व सूचना के आने वाले मरीजों को यहां समय पर उपचार नहीं मिलता तो मरीजों के परिजन मरीज को लेकर यहां-वहां हॉस्पिटलों में घूमते रहते हैं।
-----

जनप्रतिनिधि व छुटभैये नेताओं के फोन से परेशान अधिकारी
यहां बाहरी जिलों के मरीजों को भी तत्काल भर्ती करने के लिए कई जनप्रतिनिधि और नेता चिकित्सा अधिकारियों और मेडिकल कॉलेज से जुड़े अधिकारियों पर लगातार फोन कर दबाव बनाते है कि उन्हें हर हाल में भर्ती किया जाए, जबकि कई ऐसे मरीज इसमें यहां भेजे जा रहे हैं जिन्हें ऑक्सीजन या अन्य किसी गंभीर उपचार की जरूरत नहीं है।

-----
एम्बुलेंस छोड़ कर चली गई और बाद में ....

ऐसे सर्वाधिक मामले इएसआईसी में सामने आ रहे हैं, जहां एम्बुलेंस मरीजों को परिसर में छोड़कर वापस चली जाती है, तब यहां पलंग खाली नहीं होने सेे मरीजों को परेशानी होती है, यदि उन्हें पलंग मिल गया तो ठीक, लेकिन यदि व्यवस्था नहीं होती तो वे फिर से महंगे दामों पर एम्बुलेंस करने के लिए मजबूर होते हैं।
-----

ये है प्रोटोकॉल
किसी भी मरीज को रैफर करने से पहले वहां के अधीक्षक या संबंधित विभाग के प्रभारी से रैफर करने वाले चिकित्सक को बात करनी होती है, जिससे मरीज को वाकई परेशानी क्या है, ये स्पष्ट हो जाता है कि पलंग की उपलब्धता है या नहीं । लेकिन अधिकांश चिकित्स इस प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे।

इनका कहना है
बाहरी जिलों से लगातार मरीजों को बिना प्रोटोकॉल पालन के रैफर के नाम पर भेजा जा रहा है, खाली खुद का काम टालने के लिए भी कई बार ऐसे मरीजों को भेजते हैं, जिनका उपचार वहां संभव है। कई बार कम खर्च की उम्मीद में इएसआईसी, अधिग्रहित जीबीएच बेड़वास, व अम्बामाता हॉस्पिटल में पलंग के लिए मरीज बेवजह घूमते रहते हैं।

डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर

bhuvanesh pandya
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned