PATRIKA IMPACT: उदयपुर रेडिसन ब्ल्यू होटल मामले को लेकर फिर आयी ये खबर, हाईकोर्ट के फैसले पर मांगा मार्गदर्शन

PATRIKA IMPACT: उदयपुर रेडिसन ब्ल्यू होटल मामले को लेकर फिर आयी ये खबर, हाईकोर्ट के फैसले पर मांगा मार्गदर्शन

Mukesh Hingar | Publish: Dec, 29 2017 02:17:15 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर . सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे को हटाने के मामले में गुरुवार को यूआईटी ट्रस्ट की बैठक में निर्णय कर हाईकोर्ट आदेशों के तहत सरकार से मार्गदर्शन म

उदयपुर . फतहसागर के किनारे होटल रेडिसन ब्ल्यू (पूर्व में शेरेटन) की जमीन से अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे को हटाने के मामले में गुरुवार को यूआईटी ट्रस्ट की बैठक में निर्णय कर हाईकोर्ट आदेशों के तहत सरकार से मार्गदर्शन मांगा। साथ ही ट्रस्ट ने तय किया कि होटल पहले सरकारी जमीन से कब्जा तो हटाए, उसके बाद मामले पर आगे चर्चा की जाए।


होटल की ओर से नियमन को लेकर सरकार के जरिए यूआईटी को मिले पत्र पर ट्रस्ट की बैठक में चर्चा की गई, इसमें ट्रस्ट ने सुझाया कि किसी भी प्रकार का विचार करने से पहले सरकारी जमीन पर जो अतिक्रमण किया गया है, उसे होटल अपने स्तर पर हटाए। बैठक में नियमन के मुद्दे पर निर्णय किया कि राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार मामले में हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है, उसके अनुसार राज्य सरकार यह मार्गदर्शन दे कि इसमें क्या किया जाए।

 

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हाईकोर्ट में होटल की तीन अपीलें खारिज
होटल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में तीन अपीलें दायर कर यूआईटी तहसीलदार के आदेशों को चुनौती दी थी जिसे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2015 में खारिज कर दिया था। उससे पहले यूआईटी तहसीलदार ने होटल को जो तीन नोटिस दिए थे। पहला नोटिस यह दिया था कि होटल ने राजस्व ग्राम उदयपुर के खसरे नंबर 1, 2, 10 मीन और खसरा नंबर 11 की सरकारी जमीन पर कब्जा कर वहां अवैध निर्माण करवा लिया है। दूसरे और तीसरे नोटिस में कहा गया था कि होटल ने उसकी निजी आराजी 1939/10 और आराजी 2047 पर दो मंजिलों के स्वीकृत नक्शे प्लान से हटकर अवैध निर्माण कर लिया है। नोटिस में यह भी कहा कि झील के नो कंस्ट्रक्शन जोन में ये अवैध निर्माण किए गए हैं। इसी प्रकार यूआईटी ने होटल की जमीन से अवैध निर्माण हटाने तथा सरकारी जमीन पर किए कब्जे और अवैध निर्माण को हटाने के तीन आदेश दिए थे।

 


पत्रिका ने किया था खुलासा

होटल की गड़बडिय़ों का सर्वप्रथम राजस्थान पत्रिका ने 20 अक्टूबर 2011 को शेरेटन ने दबाई करोड़ों की सरकारी भूमि, 21 अक्टूबर को शेरेटन की उल्टी गिनती शुरू, 22 अक्टूबर को नामों की जादूगरी में स्टाम्प ड्यूटी छूमंतर, 23 अक्टूबर को शेरेटन के 112 कमरे वैध या अवैध शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर पूरा खुलासा किया था। समाचारों पर नगरीय विकास विभाग, जिला प्रशासन तथा यूआईटी ने जांच करवा निर्माण ध्वस्त करने के नोटिस थमाए थे।

 

 

उमरड़ा में बनेंगे 750 आशियाने

मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत शहर के उमरड़ा में नगर विकास प्रन्यास (यूआईटी) के अनुमोदित योजना क्षेत्र में 750 आशियाने बनेंगे। साथ ही यूआईटी की इस जमीन पर रहने वाले चौदह परिवारों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा।उक्त निर्णय चेयरमैन रवीन्द्र श्रीमाली की अध्यक्षता में हुई प्रन्यास की बैठक में किया गया। बैठक में राजस्व ग्राम उमरड़ा के आराजी नंबर 7593 से 7595, 7624 से 7626 की न्यास भूमि में से आशियाने बनाए जाएंगे। इस जमीन पर स्थित कच्चे-पक्के निर्माण को हटाकर उनमें निवासरत चौदह अनुसूचित जनजाति परिवारों को इसी योजना में समायोजन करने का निर्णय किया। बैठक में सचिव रामनिवास मेहता सहित अन्य अफसर उपस्थित थे।

 

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ये भी हुए निर्णय

आरटीओ ऑफिस के पीछे विश्वविद्यालय की भूमि से सटी 80 फीट चौड़ी सडक़ का नामकरण सातवीं शताब्दी के महाकवि के नाम पर ‘महाकवि माघ मार्ग’ रखने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इस निर्णय को संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति को विचारार्थ भेजा जाएगा।
आशीर्वाद नगर में नवनिर्मित न्यास के सामुदायिक भवन के किराये का पुनर्निर्धारित 3100 प्रतिदिन किया गया।


विभिन्न विकास कार्यों के लिए 244.89 लाख रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई।
डांगियों की पचोली में सीएम जन आवास योजना के अन्तर्गत प्रस्तावित आर्थिक दृष्टि से कमजोर आयवर्ग के लिए फ्लेट्स निर्माण कार्य के लिए प्राप्त न्यूनतम निविदा दर को अनुमोदित कर सक्षम स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजने का निर्णय किया।


न्यास की ओर से खान एवं भू-विज्ञान विभाग के 95 लाख रुपए के वित्तीय सहयोग से पौधरोपण के लिए राजस्व ग्राम भुवाणा के खसरा संख्या 2694, 4441/2691, 4291, 2692, 2693, 4280 एवं 4290 की न्यास आधिपत्य की भूमि की चारदीवारी के लिए तकनीकी स्वीकृति।

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