प्लेटलेट: एमबी के ब्लड बैंक का स्टॉक '0, दस हजार से ज्यादा तो चढ़ाने की जरूरत नहीं

- डेंगू व अन्य बीमारियों में जरूरत बढ़ा

- 24 घंटे पहले करना होता है रक्तदान, तब मिलता है प्लेटलेट

By: bhuvanesh pandya

Published: 13 Oct 2021, 10:24 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में इन दिनों प्लेट्लेट्स की मांग बढऩे के कारण स्टॉक 0 हो चुका है। जहां एक ओर डेंगू लोगों के प्लेटलेट घटा रहा है तो अब जरूरत पर एमबी में प्लेटलेट उपलब्ध नहीं है। ऐसा इसलिए है कि मरीज व परिजन डर व भ्रम के कारण जानकारी के अभाव में प्लेटलेट लेने दौड़ रहे हैं। जबकि दस हजार से अधिक प्लेटलेट यदि किसी में बचा है, तो ऐसे में मरीज को प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत नहीं है। वर्तमान में जहां एमबी में ब्लड स्टोरेज केपेसिटी 1700 यूनिट की है, वहीं अब इसमें स्टोरेज 898 यूनिट है। पहले दिन यदि डोनेट होता है, तो उसे दूसरे दिन प्लेटलेट तैयार होकर दिए जा सकते हैं। इसमें टेस्ट, प्रोसेस में समय लगता है। करीब 24 घंटे लगते हैं। एमबी प्रशासन ने लोगों से रक्तदान की अपील की है।
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ये है एमबी का सिस्टम -
एमबी अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने बताया कि ब्लड से सिंगल डोनर और रेंडम डोनर प्लेटलेट्स बनाया जाता है। खून से तीन से चार केटेगरी आरबीसी, प्लेट्लेट, ट्रायोपेसिप्लेटेड प्लाज्मा, एफएफपी फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा बनाते है, जरूरत पर चढ़ाया जाता है। एसडीबी में 300 एमएल प्लेटलेट निकलता है, जबकि आरडीबी में 40 एमएल प्लेटलेट होता है। एक मरीज को चार से पांच आरडीबी चढ़ाएंगे, इसके बराबर एक एसडीबी होता है। एसडीबी के लिए प्रोसेसिंग खच दस हजार रुपए हैं, जबकि आरडीबी नि:शुल्क उपलब्ध है।
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प्लेटलेट- यह रक्त का एक भाग है, जो खून का थक्का बनाने में सहायक हैं। चोट लगने पर होने वाले रक्तस्त्राव को ये रोकती हैं। शरीर में इनकी संख्या कम होने पर मौत भी हो सकती है।
- स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में डेढ़ से चार लाख प्लेटलेट्स सामान्यतया होती हैं। किसी कारण से यदि ये 50 हजार से कम हो जाएं तो चिंता की बात नहीं। लेकिन इससे भी कम होने पर रक्तस्त्राव होता है। दस हजार है और रक्तस्त्राव नहीं है तो भी चिंता की जरूरत नहीं।
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- वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. महेश दवे ने बताया कि अभी 20 से 30 हजार प्लेटलेट वाले मरीज सामने आ रहे हैं, फिलहाल डेंगू कमी का सबसे बड़ा कारण है। प्लेटलेट डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टायफस, टायफ ाइड जैसे रोगों में और दर्द निवारक दवाएं नियमित लेने से घटती है। 10 हजार से कम होने पर ब्लिडिंग नहीं होने पर भी प्लेटलेट चढ़ाना होता है। ऐसे में ये जरूरी है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती कर रोगी से मिलते ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति का प्लेटलेट चढ़ाया जाए।

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फैक्ट फाइल
ग्रुप- पेक्ड आरबीसी- टेस्टेड ब्लड- प्लेटलेट आरडीबी - कुल
ए प्लस- 18- 1-0-19
ए नेगेटिव- 7- 0-0-7
बी प्लस- 236- 2- 0- 238
बी नेगेटिव- 25- 2- 0- 27
ओ पोजिटिव- 525- 0-0- 525
ओ नेगेटिव- 18- 0-0- 27
एबी प्लस- 57- 3—60
एबी नेगेटिव- 12- 0-0- 12
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कुल- 898- 8- 0-906
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ब्लड यूनिट कलेक्टेड
माह- यूनिट
जुलाई- 1823
अगस्त- 1685
सितम्बर- 2704
अक्टूबर- 921
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कंपोंनेंट तैयारी
माह- एफएफपी-आरडीपी- एसडीपी
जुलाई - 175- 164- 03
अगस्त- 2475- 374-06
सितम्बर - 2384-1073-38
अक्टूबर-806- 390- 22
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मैंने 61 बार रक्तदान किया है। मैं हर व्यक्ति से अपील करता हूं कि उन्हें समय-समय पर रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान करने के बाद मन में एक सुकून मिलता है, शरीर को नुकसान नहीं है, इससे हम स्वस्थ रहते हैं। वर्ष 2000 में पिता की मृत्यु होने के बाद रक्तदान का संकल्प लिया, जो लगातार जारी है।

अजय खतूरिया, रक्तदाता
यदि किसी व्यक्ति में दस हजार से अधिक प्लेटलेट हैं, और रक्तस्त्राव नहीं हो रहा है तो उसे प्लेटलेट चढ़ाने की जरूरत नहीं है। दस हजार से कम होने पर जरूरत रहती है।
डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

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