आशियाने का सपना साकार, यूआईटी ने पीएम आवास की लॉटरी निकाली

उदयपुर. आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए आरक्षित 438 जनों का आवास का देखा सपना पूरा हुआ।

By: Jyoti Jain

Published: 27 Jan 2018, 07:41 AM IST

उदयपुर . आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए आरक्षित 438 जनों का आवास का देखा सपना पूरा हुआ। नगर विकास प्रन्यास ने अपने सभागार में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अन्तर्गत पन्नाधाय नगर दक्षिण विस्तार योजना में आरक्षित 438 आवासगृहों के लिए लॉटरी यूआईटी चेयरमैन रवीन्द्र श्रीमाली ने निकाली। सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि वर्गवार पात्र आवेदकों की लॉटरी निकाली, उन्होंने बताया कि पीएम आवास के लिए कुल 4897 आवेदन पात्र थे। इस दौरान भूमि अवाप्ति अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह शेखावत, अधीक्षण अभियन्ता संजीव शर्मा, अधीशासी अभियंता अनित माथुर, मुख्य लेखाधिकारी दलपत सिंह राठौड़ आदि उपस्थित थे।

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उदयपुर. जीवन में अच्छी शिक्षा के साथ बेहतर भविष्य का सपना हर कोई देखता है। अब चाहे वो डॉक्टर हों, इंजिनियर, एडवोकेट, टीचर या फिर किसी विभाग में ऑफिसर ही क्यों न हों। कुछ लोग निजी व्यवसाय करके भी सामाजिक मान-प्रतिष्ठा हासिल करते हैं। यह सिलसिला बरसों-बरस एक पीढ़ी से दूसरी-तीसरी पीढ़ी अनवरत चलता रहा है और आगे भी जारी रहेगा। कुछ एेसी ही प्रेरक कहानी है लेकसिटी के दो युवा उद्यमियों असीम बोलिया और शुभम बाबेल की। इन्होंने साल 2014 में एक साथ लाखों का पैकेज छोड़कर अपने शहर के लिए कुछ अनूठा करने का मानस बनाया। वे बताते हैं 'औरों की तरह हमारे परिजनों ने भी हमें पढ़ाया, लायक बनाया। मैकेनिकल और कैमिकल इंजिनियरिंग करके लाख सालाना पैकेज पर काम करते एक दिन विचार आया कि अपने शहर में अपनों के बीच एेसे सपने बुनें जिसकी तामीर हर एक को बुलंदी दे सकें। बस, फिर क्या था? परिजनों संग विचार विमर्श और ना-नुकर के बाद शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर ईको ग्रीन और कॉस्ट इफेक्टिव 'फ्लाई एेश ब्रिक्स' प्लांट की स्थापना की।'

 

क्या है अनोखा इसमें

असीम बताते हैं 'अक्सर उपजाऊ मिट्टी खोदकर ईंटें बनाते और उन्हें पकाने के लिए भट्टों से निकलने वाले धुएं को देखकर बचपन में कई बार पीड़ा होती थी। अपनी शिक्षा के दौरान इससे निजात पाने के उपायों पर भी बहुत बार मित्रों से चर्चाएं कीं। दरअसल, उसी विचार को अमली जामा पहनाकर हम दोनों बेहद खुश हैं। इसलिए नहीं कि प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया मुहिम से जुड़ गए बल्कि इसलिए भी कि इस प्रोजेक्ट के कारण हम अपने शहर अपनों के बीच आकर इस शहर और आसपास की उपजाऊ धरा को खोदे जाने के अलावा पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने में भी अपना योगदान दे पाए हैं। इतना ही नहीं, इन ईंटों का निर्माण पावर प्लांट से वेस्ट के रूप में बचने वाली उस राख को रिसाइकल कर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे निस्तारित करना सरकार के लिए भी बहुत जटिल काम साबित हो रहा था।'

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