राजस्थान में वन विभाग की सख्ती से उखड़े तस्करों के पांव, जंगलों को अब आया सुकून

पांच साल में 74 फीसदी घटे वन्यजीव अपराध, राज्य में वन्यजीव शिकार और हत्याओं के मामले में 95 प्रतिशत तक की कमी

By: jitendra paliwal

Published: 03 Jan 2020, 10:40 PM IST

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. टाइगर रिजर्व और ऐसे ही दूसरे प्रोजेक्ट, शिकार और वन्यजीव हत्याओं पर सरकार की सख्ती के सुखद नतीजे सामने आने लगे हैं। देशभर में पिछले पांच साल में वन्यजीव अपराधों में औसतन 74 फीसदी तक कमी आ गई है, वहीं राजस्थान ने इस मामले में बेहद अच्छी स्थिति हासिल कर ली है। यहां वर्ष 2014 के मुकाबले 2018 तक लगभग 95 प्रतिशत वन्यजीव अपराध घट चुके हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक पांच साल पहले तक राज्य में वन्यजीव अपराधों की स्थिति चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई थी। संरक्षित श्रेणी के जीवों को न केवल मारा जा रहा था, बल्कि शिकार के बाद तस्करी तक के मामले पकड़ में आए थे। अवैध शिकार से निपटने के लिए सरकार ने वाइल्ड लाइफ (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत सजा के प्रावधानों के उल्लंघन पर कार्रवाई में सख्ती लागू करना शुरू कर दिया। इस काम में राज्यों को ज्यादा जिम्मेदार बनाया गया और उनकी मदद ली। शिकार में इस्तेमाल उपकरण, वाहन या हथियारों की जब्ती के अलावा शिकारियों के नेटवर्क का पता लगाना, उन्हें गिरफ्तार करना, अदालतों में आरोप-पत्र दाखिल करने से लेकर पैरवी तक के सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त किया गया। केन्द्र सरकार ने राज्यों में कानून प्रवर्तन अधिकारियों के खिलाफ सख्त निगरानी भी रखी। खुफिया जानकारी जुटाने के लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना के जरिये जंगली जानवरों और जानवरों के अवैध व्यापार के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता लगाया गया।
नेशनल पार्क, संरक्षण परियोजनाओं से मिला बल
जानकारों का कहना है कि टाइगर रिजर्व जैसे प्रोजेक्ट से भी अपराधों में कमी लाने में मदद मिली। इससे गश्त और जंगलों में निगरानी तंत्र को मजबूती मिली, वहीं पर्यटन को बढ़ावा मिलने से तस्करों के पांव उखड़ते चले गए। संरक्षित क्षेत्र घोषित करने के अलावा राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण भंडार और कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों के लिए लाई गई परियोजनाएं बेहद कारगर रही। बाघ, हाथी, शेर, तेंदुए जैसे रोमांच जगाने वाले जीवों के आवासों को संरक्षण देने से हालात बदलने लगे हैं।
राजस्थान-एमपी में घटे, उत्तराखण्ड में बढ़े
राष्ट्रीय वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के आंकड़ों पर नजर डालें तो वन्यजीवों के लिए सबसे मुफीद राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू जैसे राज्यों में जंगली जानवरों की जिन्दगी से खतरा टला है। अपवाद के तौर पर उत्तराखण्ड में इसके विपरीत अपराध बढ़ गए हैं।
देशभर में घटे
राजस्थान में वर्ष 2014, 2015, 2016, 2017 व 2018 में क्रमश: 141, 18, 9, 1 और 5 मामले तथा देशभर में इन्हीं चार सालों में कुल 1500, 698, 565, 342 और 388 मामले वन्यजीव अपराध के दर्ज हुए थे।
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[ एक्सपर्ट व्यू ]

सजाओं से बैठा डर
मुझे लगता है पेशेवर तस्करी में अब रुचि कम हो गई है। तस्करों में कानून और सजाओं का डर भी फैला है। दोनों तरफ से इसका असर हुआ है। जंगलों में लकडिय़ों की कटाई कम होने लगी है। गैस सिलेण्डर पर ईंधन की निर्भरता बढऩे व लकडिय़ों पर घटने से भी यह सकारात्मक बदलाव आ रहा है। इमारती लकड़ी के लिए हमारे यहां पेड़ इतने नहीं काटे जाते हैं। और भी कुछ वजहें रही हों, लेकिन यह अच्छा संकेत है।
औंकारलाल मेनारिया, वन्यजीव विशेषज्ञ

jitendra paliwal
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