कठपुतलियों में जान फूंकने वाले सडक़ों पर खिलौने बेचने को मजबूर

कोरोना महामारी से उत्पन्न हुआ आजीविका का संकट, कई कठपुतली कलाकार मुश्किल से कर रहे गुजर-बसर

By: madhulika singh

Published: 23 Sep 2020, 02:33 PM IST

उदयपुर. बेजान कठपुतलियों में जान फूं क कर मनोरंजन करने वाले और राजस्थान की पारंपरिक कठपुतली कला के कलाकारों की आजीविका पर आज संकट खड़ा हो गया है। जो कलाकार देश-विदेश में कार्यक्रम करने जाते थे और विदेश के लोग उनसे यहां मिलने आते थे, वे अब सडक़ों की खाक छान रहे हैं। साथ ही सडक़ों पर घास से बने खिलौने बेचने को मजबूर हैं। कोरोना महामारी के कारण उनके ऐसे दिन आ गए हैं कि उनकी आजीविका पर ही संकट खड़ा हो गया है। कठपुतली कलाकार इन दिनों अपने पेशे के अनुसार कहीं कार्यक्रम करते नहीं बल्कि सुखाडिय़ा सर्कल पर अपने छोटे बच्चों के साथ यहां घास के खिलौने बेचते नजर आ रहे हैं।

शहर में 50-60 परिवार
कठपुतली कलाकार व द पपेट विलेज के मुकेश भाट ने बताया कि वे कठपुतली कला के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं लेकिन आज वे इस कला से ही दूर है। जो कला उनकी आजीविका का साधन थी, वह आज उससे गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान से ही कठपुतली कलाकारों की आजीविका चलानी मुश्किल हो गई थी। शहर में करीब 50-60 परिवार हैं, जो नीमचखेड़ा व बडग़ांव में रहते हैं और सब ही ऐसी मुश्किलों से जूझ रहे हैं। पहले लॉकडाउन में कहीं बाहर भी नहीं निकल पाते थे। अब अनलॉक होने के बाद भी ना तो कोई कार्यक्रम मिल रहे हैं, ना ही कहीं पर्यटक हैं। होटल्स में भी अब कार्यक्रम के लिए नहीं बुलाते। कुछ सरकारी कार्यक्रम अभी जरूर हुए हैं, लेकिन उनसे उतना गुजारा संभव नहीं हो पाया है। ऐसे में मजबूरी में दूसरे विकल्प के रूप में घास के खिलौने बनाकर जगह-जगह बेच रहे हैं। सरकार अगर कलाकारों की मदद के लिए कुछ करे तो अच्छा होगा।

ghaas_k_khilone.jpg

फिर भी गुजारा मुश्किल

इसी तरह अन्य कलाकार कुंदन भाट, पवन भाट ने बताया कि वे लोग रोज पेट की खातिर निकल पड़ते हैं सडक़ों की खाक छानने। कभी सोचा नहीं था कि ऐसे दिन भी आएंगे। बारिश हो या कड़ी धूप बच्चों को भी साथ ही ले जाते हैं। ऐसे दिनों में उनका धंधा और नहीं चल पाता है फिर भी वे कभी सुखाडिय़ा सर्कल तो कभी फतहसागर, कभी एक मॉल तो कभी दूसरे मॉल खिलौने बेचने को जाते हैं। मुश्किल ये भी है कि अभी तो लोग कुछ खरीद भी नहीं रहे हैं। वे कुछ भी लेने से डरते हैं लेकिन कभी-कभी हमारी मजबूरी देखकर ले भी लेते हैं। ऐसे में रोज की कमाई भी कोई निश्चित नहीं है।

COVID-19 virus
madhulika singh Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned