ये क्या हड़बड़ी में पीडब्ल्यूडी ने भुला दिए ये कायदे, न विभागीय कायदे न ग्रेड लाइन लगी

ये क्या हड़बड़ी में पीडब्ल्यूडी ने भुला दिए ये कायदे, न विभागीय कायदे न ग्रेड लाइन लगी

Mukesh Hingar | Publish: Dec, 31 2017 03:50:46 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर . आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू होने से पूर्व सरकारी तंत्र में हड़बड़ी का आलम है।

उदयपुर . आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू होने से पूर्व सरकारी तंत्र में हड़बड़ी का आलम है। जल्दबाजी में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को एक किनारे कर ऐन-केन-प्रकारेण इनके शिलान्यास व उद्घाटन की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जल्दबाजी में ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ने केवल कार्यादेश देकर गोगुंदा के मजावड़ा से उभयेश्वर और गोगुंदा-ओगड़ा के बीच सडक़ निर्माण कार्यों का शिलान्यास करवा दिया। इन सडक़ निर्माण कार्यों का भूमि पूजन भी मौके पर नहीं जाकर कई किलोमीटर दूर करवाया गया। विशेष यह है कि करीब 50 फीसदी न्यून दर वाले इन निर्माण कार्य में मौके के भौतिक तथ्यों को दरकिनार करते हुए विभागीय ओहदेदारों ने गृहमंत्री से इनका भूमिपूजन करवा दिया, जिसकी प्राथमिक रूपरेखा भी तैयार नहीं हुई है।

 

इतने कम में कैसा कार्य : मजावड़ा से उभयेश्वर रोड पर तख्मीने में संवेदक को 83,070 घन मीटर मिट्टी कार्य, 32,734 घन मीटर ओर्डिनरी रॉक, 11,067 घन मीटर हार्ड रॉक, 16818 घन मीटर रोड कटिंग मेटेरियल, 45 सौ घन मीटर पटरियां, 6847 घन मीटर ग्रेवल, 2806 घन मीटर बिटूमिन मेकेडम, 44525 वर्ग मीटर डामर प्राइमर कोड, 56,100 वर्ग मीटर डामर झारा, 1683 घन मीटर बिटूमिन कंक्रीट, 2 हजार घन मीटर कंक्रीट-सीमेंट और दीवार कार्य में 1756 घन मीटर सीमेंट-कंक्रीट कार्य गुणवत्ता के साथ करवाना है। विभाग के इंजीनियर्स ने निर्माण की लागत 866 लाख रुपए आंकी थी, जबकि संवेदक ने 33.21 प्रतिशत न्यून दर पर इसी कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी ली है। इसके बावजूद संवेदक को कुल राशि का 18 फीसदी जीएसटी, 2 फीसदी टीडीएस सहित अन्य टैक्स चुकाने हैं। इसी प्रकार गोगुंदा-ओगड़ा रोड निर्माण भी 33 फीसदी न्यून दर पर करना तय हुआ है। गौरतलब है कि सलूम्बर विधायक अमृतलाल मीणा न्यूनतम दर की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री के समक्ष भी शिकायत कर चुके हैं।

 

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इनकी हुई अनदेखी : अतिरिक्त मुख्य अभियंता कार्यालय से हुई निविदा में फिर 100-120 टीएचपी (होट प्लांट) को लेकर संवेदक की भौतिक सत्यता को नहीं जांचा गया। अभियंताओं ने शपथ पत्र में बताए गए संबंधित प्लांट का मौका निरीक्षण भी नहीं किया। कार्यादेश के साथ विभाग ने सेंशर पेवर मशीन, निर्माण स्थल के किनारे बेंच मार्क (मुटाम) लगाकर रीडिंग दर्ज नहीं की। मुटाम पर ग्रेड लाइन तय करने से भी दूरी बनाए रखी। ग्रेवल और मिट्टी के उपयोग को लेकर पीआई क्षमता जांचने का जोखिम भी नहीं उठाया।

 


दीवार में पत्थर नहीं

पीडब्ल्यूडी ने पहली बार निर्माण कार्यों को स्थानीय स्तर पर चुनौती दी है। संभवत: यह पहला मामला होगा, जब सडक़ किनारों पर मिट्टी कटाव को रोकने के लिए निर्माण काम में रिर्टनिंग वाल और पुलिया निर्माण के लिए सीमेंट और कंक्रीट का उपयोग होगा। चुनाई में कहीं भी पत्थर या ईंट का उपयोग नहीं होगा। खास तो यह भी है कि गोगुंदा-मजावड़ा से उभयेश्वर के बीच बनी हुई ग्रेवल सडक़ पर महानरेगा और फेमिन योजना के तहत भी सडक़ कार्य पहले ही हो चुका है और पुलियाएं भी बनाई गई हैं, विभाग के जी-शिड्युल में इन तथ्यों को स्पष्ट नहीं किया गया है।

 

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मलमास के बाद निर्माण
सर्वे कार्य एजेंसी को करना होता है। मुटाम और रीडिंग कार्य अब तक नहीं हुआ है। मलमास के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है। कार्य समाप्ति अवधि लगभग 10 माह है।
नटवरसिंह डामोर, सहायक अभियंता, ग्रामीण खण्ड

 

विभाग की जिम्मेदारी
संवेदक से गुणवत्तायुक्त कार्य कराना विभाग की जिम्मेदारी है। जी-शिड्युल में क्या शामिल है। बिना देखे नहीं कह सकता। सर्वे और निर्माण कार्य का शिलान्यास से कोई मतलब नहीं है।
मांगीलाल वर्मा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, उदयपुर संभाग

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