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Rajasthan News : उपभोक्ताओं को झटका, वसूल हो चुकी राशि फिर वसूलेंगी बिजली कंपनियां !

वर्ष 2021-22 में विद्युत निगमों ने सालभर के ईंधन अधिभार के बजाय तीन माह का आधार ईंधन अधिभार रखा था, जिसकी वसूली पिछले दो साल से 7 पैसा प्रति यूनिट की दर से की जा रही है।

उदयपुरJul 05, 2024 / 06:50 pm

जमील खान

पंकज वैष्णव

Udaipur News : उदयपुर. हाल ही अडानी पावर कम्पनी पर कोल इंडिया की ओर से लगे इवेक्युएशन फेसिलिटी चार्ज का भार जनता पर डालने का आदेश जारी हुआ था, वहीं अब श्री सीमेंट कम्पनी की एक याचिका पर ट्रिब्यूनल में हुए फैसले के बाद राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (आरईआरसी) ने करीब 5 हजार करोड़ की वसूली का आधार बदलने का आदेश दिया है। खास बात यह कि इसमें हाईकोर्ट के आदेश को भी नजरअंदाज किया गया। आदेश की पालना हुई तो निगम उपभोक्ताओं से वह राशि वसूल करेगा, जो पहले ही की जा चुकी है।
वर्ष 2021-22 में विद्युत निगमों ने सालभर के ईंधन अधिभार के बजाय तीन माह का आधार ईंधन अधिभार रखा था, जिसकी वसूली पिछले दो साल से 7 पैसा प्रति यूनिट की दर से की जा रही है। इस बीच हाईकोर्ट ने ब्याज माफ करने का आदेश दिया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने विशेष ईंधन अधिभार के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर निर्णय करते हुए 9 नवम्बर 2023 को आदेश जारी किया था।
उस दरम्यान ईंधन अधिभार पर श्री सीमेंट लिमिटेड ब्यावर ने आपत्ति जताते हुए दिल्ली ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इस पर अब फैसला कम्पनी के पक्ष में रहा। लिहाजा आरइआरसी ने दो साल पहले के ईंधन अधिभार की वसूली करने का आदेश दिया, जबकि ब्याज माफ किए जाने की स्थिति में मूल राशि अब तक वसूल कर ली गई। ऐसे में अब आगे इस नाम से राशि वसूली योग्य नहीं है, बल्कि अधिक वसूली गई राशि वापस लौटानी चाहिए।
टॉपिक एक्सपर्ट
राजस्थान के तीनों डिस्कॉम्स ने एप्टेल नई दिल्ली के 12 मार्च 2024 के निर्णय के आधार पर आरईआरसी के समक्ष याचिका दायर की थी। इसमें आयोग के 1 सितम्बर 2022 के आदेश के विरुद्ध दायर याचिकाओं में राजस्थान हाईकोर्ट के 9 नवम्बर 2023 के निर्णय का सन्दर्भ नहीं दिया, जबकि कोर्ट के निर्णय की कॉपी निगम व आयोग को भी मिली थी। आयोग ने भी निर्णय का सन्दर्भ इसी विषय पर अब पारित आदेश में नहीं दिया। यह बड़ी चूक है, जिस पर आदेश लागू करने से पहले विनियामक आयोग को पुन: विचार करना चाहिए। -वाइ.के .बोलिया, पूर्व एसई व ऊर्जा सलाहकार
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आदेश के अनुसार कुल 5337.04 करोड़ की वसूली योग्य राशि में से 2709.36 करोड़ (2288.40 करोड़ मूल और 420.96 करोड़ ब्याज) की राशि है, जो वर्ष 2019 से 36 मासिक किस्तों में वसूल ली गई शेष राशि 2627.68 करोड़ ही वसूली योग्य बची, फिर अक्टूबर 2022 से 7438.58 करोड़ राशि 60 मासिक किस्तों में वसूली शुरु हुई, उसमें से जुलाई 2024 तक के 22 माह में 7 438.58 करोड़ में से 2727.48 करोड़ वसूली हो जाएगी

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