VIDEO : तम्बा​कू का सेवन नहीं करने वालों को भी इन कारणों से हो जाता है कैंसर, डाइट बदलना मोटापे का समाधान नहीं ...

- राजस्थान पत्रिका हैल्थ टॉक शो ‘स्वस्थ राजस्थान : स्मार्ट राजस्थानी’

By: Sikander Veer Pareek

Updated: 19 Jan 2019, 03:03 PM IST

भगवती तेली/उदयपुर . स्वास्थ्य है तो सब कुछ है लेकिन इनसे जुड़ी शंकाएं भी कम नहीं है। मसलन मोटापा, कैंसर और नवीनतम आईवीएफ तकनीक को लेकर कई भ्रांतियां हैं लेकिन आखिर किससे पूछे और बताएगा कौन? नि:संतानता, मोटापा, बवासीर व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों ने लोगों को घेर लिया है। विषय विशेषज्ञों के अभाव में लोग समय पर इनका उपचार नहीं करा पाते और अंत में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इसके मद्देनजर राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार को इन रोगों को लेकर मेडिकल विशेषज्ञों को आमंत्रित किया। प्रतापनगर स्थित होटल ब्ल्यू फेदर में आयोजित स्वस्थ राजस्थान-स्मार्ट राजस्थानी हैल्थ टॉक शो इन्दिरा आईवीएफ, गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, मोहक बैराइटिक्स एंड रोबोटिक्स इन्दौर, ज्योति नर्सिंग होम जयपुर व पत्रिका की साझा मेजबानी में हुआ। इसमें न केवल विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तार से अलग-अलग विषयों की जानकारी दी बल्कि इससे जुड़ी शंकाओं का समाधान भी किया। लोगों ने बेहिचक सवाल पूछे तो चिकित्सकों ने उसी अंदाज में उन्हें विस्तार से जानकारियां दी। गीतांजलि अस्पताल से डॉ. आशीष जाखेटिया, इन्दिरा आईवीएफ उदयपुर हेड डॉ. अलका, ज्योति हॉस्पिटल से डॉ. जया माहेश्वरी ने जानकारियां दी तो मोहक बैरियाटिक एंड रॉबोटिक्स, इन्दौर के डॉ. मोहित भंडारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

व्यायाम और खाना कम करना मोटापे का स्थायी समाधान नहीं

मोहक बैरियाटिक एंड रोबोटिक्स इन्दौर से वीसी के जरिए टॉक शो से जुड़े डॉ. मोहित भंडारी ने कहा कि इस पर शोध हो चुका है कि व्यायाम करके और लाइफ स्टाइल मॉडिफाइड करके या खाना कम करके मोटापा को स्थायी रूप से दूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि 90 प्रतिशत लोग इसे आठ हफ्तों से ज्यादा फॉलो नहीं करते हैं और जो दस प्रतिशत करते भी हैं तो दो साल बाद पुन: मोटापे के शिकार हो जाते हैं। सर्जरी के जरिए मोटापे को कम किया जा रहा है। इसमें नाभि पर छेद कर अनावश्यक चर्बी निकालना, पेट के अंदर टांके लेना आदि शामिल है। इसमें सामान्य सर्जरी, बैरियाटिक और रोबोटिक सर्जरी का उपयोग किया जा रहा है।

 

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बवासीर के शुरुआती स्टेज में दवाइयों से भी इलाज संभव


ज्योति नर्सिंग होम, जयपुर की डॉ. जया माहेश्वरी ने कहा कि बवासीर के शुरुआती स्टेज में बिना सर्जरी किए ही सिर्फ दवाइयों से भी इलाज संभव है। नासूर, क्रोनिक फिशर और बवासीर के तीसरे व चौथे स्टेज में सिर्फ दवाइयों से इलाज संभव नहीं है। इसमें सर्जरी करवानी पड़ती है। बवासीर का शुरुआती लक्षण शौच के साथ खून का आना है। ऐसा होने की स्थिति में विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। बवासीर का इलाज इतना एडवांस है कि यह किसी भी स्टेज पर संभव है। इसके लिए लेजर, स्टेपलर विधियां है जो ब्लडलैस और पेनलैस है। बवासीर से जुड़े रोगों से बचाव का तरीका यहीं है कि हम डाइट, पानी आदि का ध्यान रखे।

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पांच कारणों से होता है कैंसर

गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कैंसर सेंटर के डॉ. आशीष जाखेटिया ने कहा कि कैंसर प्रमुख रूप से पांच कारणों जैनेटिक, इन्फेक्शन, तम्बाकू सेवन, कारखानों से निकलने वाले रसायनिक और प्रदूषण से होता है। इसमें तम्बाकू से बचाव प्रत्यक्ष रूप से हमारे हाथ में रहता है कि हम तम्बाकू का सेवन न करें और कैंसर से बच सके। कैंसर कोशिकाओं के अनियंत्रित विभाजन के कारण होता है। इसमें सेल शरीर के कमांड फॉलो न करते हुए खुद के कमांड फॉलो कर शरीर में ट्यूमर बना देती हैं और ब्लड सप्लाई के जरिए शरीर में फैल जाती है। देश में 22 लाख से ज्यादा कैंसर पीडि़त है। हर घंटे 3 हजार 170 नए मरीज रिपोर्ट हो रहे हैंं। कैंसर का उपचार संभव है बशर्तें प्रारंभिक स्टेज में इसका पता चल जाए और उचित चिकि त्सा परामर्श मिले।

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खुद के अंडाणु-शुक्राणुओं से भी बन सकते हैं माता-पिता
इन्दिरा आईवीएफ उदयपुर की हेड डॉ. अलका ने कहा कि यह भ्रम है कि इंफर्टिलिटी या आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) व्यक्ति के शुक्राणुओं की मदद से गर्भाशय ठहराया जाता है। इंफर्टिलिटी दो प्रकार की होती है, प्राइमरी जिसमें कभी गर्भ न ठहरा हो और सैकंडरी जिसमें दूसरी बार गर्भ नहीं ठहर रहा हो। महिलाओं में अंडाणु से शुक्राणु मिलकर गर्भाशय तक जाने में चार क्रियाएं होती हैं अगर इनमें एक में भी रुकावट हो तो गर्भ नहीं ठहरता है। ऐसे मामले में आईवीएफ के जरिए उस कमी को ढूंढकर उसमें सुधार किया जाता है।

ये जानकारियां भी दी

- आईवीएफ में निम्न समस्याओं पर जाना चाहिए। स्त्रियों की नलियों में रुकावट, अंडों का न बनना, मासिक धर्म बंद हो गया हो, पुरूषों के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी या वीर्य में शुक्राणुओं का न होना लेकिन अंडकोष में बनना, कृत्रिम गृभाधान कराने पर भी सफलता नहीं मिलना या पति-पत्नी में किसी की नसबंदी हुई हो।
- डायबिटीज की भी सर्जरी होती है। यह टाइप टू डायबिटीज के मामले में होती है। इसमें इंसुलिन तो बनता है लेकिन काम नहीं करता है। इसलिए सर्जरी की जाती है।
- कैंसर आनुवांशिक होता है। यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैल सकता है। एक बार इलाज कर लेने के बाद भी वापस हो सकता है। लेकिन इसके होने के अवसर कम होते हैं।
- बवासीर होने पर मरीज को समय पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि प्रारंभिक स्टेज में ही उसका उपचार हो सके। देरी होने पर सर्जरी करनी पड़ती है।

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