आप राजस्थान में आ रहे, मात्र इ-पास से काम नहीं चलेगा, एनओसी भी साथ जरूरी, नहीं तो होंगे परेशान

पास लेकर आए लेकिन स्थानीय प्रशासन की एनओसी नहीं तो प्रवेश नहीं

By: Mukesh Kumar Hinger

Published: 27 May 2020, 12:04 PM IST

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. आप दूसरे राज्य से उदयपुर आ रहे है और आपके पास उस राज्य की सरकार का जारी पास है इसका मतलब यह नहीं कि आप उदयपुर में आ सकेंगे। असल में उस पास के साथ-साथ आपको जिस जिले में आ रहे है उस जिले के प्रशासन की एनओसी भी लेनी होगी। अभी जितने प्रवासी अपने निजी वाहन से आ रहे है उनके पास उस राज्य का पास है लेकिन एनओसी नहीं है ऐसे में वे हाइवे पर लगी चैक पोस्ट पर ही अटक रहे है। वहां घंटों रुकना पड़ रहा है जब तक एनओसी नहीं आती। परेशान हुए प्रवासी बोले कि जितना समय उनको आने में लगा उससे ज्यादा समय यहां हाइवे पर एनओसी की इंतजार में लग गया।

पास के साथ एनओसी जरूरी
असल में राज्य सरकार ने निर्देश दे रखे है कि दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को उस राज्य के साथ संबंधित जिले में आने के लिए संबंधित जिला प्रशासन से एनओसी लेनी होगी। इस एनओसी के बिना उनको जिले में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

एनओसी ऑनलाइन मिलती
प्रवासी जिस राज्य से आना चाहता है उस राज्य में पास के आवेदन करने के साथ-साथ राजस्थान सरकार में भी ऑनलाइन एनओसी के लिए आवेदन करना होगा। प्रवासी http://emitra.rajasthan.gov.in/content/emitra/en/home.html वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण के पहले कॉलम में आवेदन करना होगा। जैसे ही उसकी एनओसी जारी होगी उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश आएगा। इसके बाद वह राजकॉप एप में जाकर यूजर आईडी व पासवर्ड के नीचे की तरफ माई ई-पास/एनओसी जहां लिखा है उसको क्लिक करना है वहां से एनओसी डाउन क्यूआर कोड के रूप में डाउनलोड कर सकते है। जब भी वे उस प्रदेश के पास के साथ निकलेंगे तब उनको उदयपुर में आने पर शहर की सीमा की चेक पोस्ट पर यह एनओसी बतानी होगी।

हाथों-हाथ एनओसी भी जारी की जाए
लोगों का कहना है कि लोग बड़ी मुश्किल से दूसरी जगह से यहां पहुंच रहे है। उनको एनओसी की जानकारी नहीं है। आने वाले को पास मिल गया तो वे इसे ही सब मान रहे है। बाहर से आकर यहां परेशान हुए लोगों का कहना है कि दूसरे राज्यों की कई जांच से गुजर कर मान्य दस्तावेजों के साथ जो यहां आ रहे है। उनको उन दस्तावेंजों की जांच व पास को मानते हुए चेक पोस्ट पर ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए ताकि उनको इतना परेशान नहीं होना पड़े।

समझे तीन केस

केस 1 - मुंबई से पिछले दिनों 600 किलोमीटर का सफर पूरा कर उदयपुर आए परिवार को पांच घंटे बलीचा पर रुकना पड़ा। उनके पास महाराष्ट्र सरकार से जारी पास था पर यहां उनको स्थानीय एनओसी मांगी गई, स्टाफ ने कहा कि आप बीएलओ से सम्पर्क कर ले, परेशान हुए, बीएलओ का नंबर जुटाया बंद था। परिवार पांच घंटे तक बलीचा बैठा रहा जब तक एनओसी नहीं आई

केस 2 - अहमदाबाद से एक परिवार आया, बुढ़े माता-पिता हाइवे पर ही परेशान हुए। पास था लेकिन एनओसी मांगी गई जो नहीं थी। बाद में अपने इलाके के पार्षद आशीष कोठारी को बुलाया हाइवे पर। वे कलक्टरी गए सारी औपचारिकताएं पूरी की। एनओसी जारी की गई। इसके बाद परिवार घर पहुंचा। उनका कहना था कि वे आधा सफर पूरा करे जितना समय तो हाइवे पर बिताया।

केस 3 - सूरत से उदयपुर आए प्रवासियों की कार को रोका गया। सूरत कलक्टर का पास था लेकिन यहां की एनओसी नहीं थी। वे बोले कि जितने समय सूरत से आने में लगे उससे ज्यादा समय तो यहां एनओसी बनाने में लग गया।

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Mukesh Kumar Hinger Desk
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