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उदयपुर

राजस्थान के लच्छीराम ने 1971 में देहदान करने का ठाना, वसीयत में कर दी देहदान की घोषणा, अब परिवार निभा रहा परम्परा

Rajasthan News : महज दूसरी जमात पास राजसमंद जिले के देवगढ़ निवासी लच्छीराम सुखलेचा ने उस दौर में उदयपुर के आरएनटी मेडिकल में एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों की परेशानी को अपनी आंखों से देखा तो मन ही मन देहदान करने की ठान ली।

उदयपुरMay 16, 2024 / 05:32 am

Omprakash Dhaka

Rajasthan Rajsamand district Donation of body announced in the will Lachchiram Sukhlecha Family Donation Of Body

उदयपुर का सुखलेचा परिवार, जिसके ज्यादातर सदस्य देहदान का संकल्प कर चुके हैं। 

Lachchiram Sukhlecha Family Donation Of Body : बात उन दिनों की है, जब देहदान के बारे में सोचना तो दूर लोग जानते तक नहीं थे। महज दूसरी जमात पास राजसमंद जिले के देवगढ़ निवासी लच्छीराम सुखलेचा ने उस दौर में उदयपुर के आरएनटी मेडिकल में एमबीबीएस कर रहे विद्यार्थियों की परेशानी को अपनी आंखों से देखा तो मन ही मन देहदान करने की ठान ली। यह अलख ऐसी जगी कि परिवार में लच्छीराम और उनकी पत्नी हंजा बाई सहित अब तक नौ जने देहदान कर चुके। वहीं परिवार के 51 सहित 350 लोग इसके लिए मेडिकल कॉलेज में पंजीयन करवा चुके।
वाकया 1971 का है, जब लच्छीराम सुखलेचा के पुत्र पुखराज उदयपुर के रविंद्रनाथ टेगौर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे थे। एक दिन बेटे से मिलने उदयपुर आए पिता सीधा मेडिकल कॉलेज के एनोटाॅमी विभाग में पहुंच गए। जहां एक मृत शरीर पर सोलह मेडिकल विद्यार्थी प्रायोगिक अध्ययन कर रहे थे। ऐसे में प्रत्येक विद्यार्थी के लिए मानव शरीर की अंग रचना को समझना मुश्किल हो रहा था। इस स्थिति ने लच्छीराम को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मन ही मन ठान लिया कि मृत्यु के बाद वे अपने शरीर को मेडिकल कॉलेज में दान करेंगे। लेकिन उस दौर में देहदान को लेकर प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। ऐसे में लच्छीराम गांव से उदयपुर आते और जिला कलक्टर को देहदान के लिए ज्ञापन देते रहे।

वसीयत में कर दी देहदान की घोषणा

आखिरकार 1994 में लच्छीराम सुखलेचा ने अपनी वसीयत बनाई, जिसमें अपनी देहदान करने की घोषणा कर दी। इस बीच वे लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करते रहे। 8 मई 2010 को उनकी मृत्यु उपरांत उनके पुत्रों ने पिता की इच्छा के मुताबिक उनका देहदान किया। खास बात यह रही कि पिता के तीये के अवसर पर सामूहिक देहदान संकल्प पत्र भरवाने तथा रक्तदान शिविर का आयोजन किया। 2011 में परिवार ने इसके लिए बकायदा लच्छीराम हंजा देवी सुखलेजा चेरिटेबल ट्रस्ट बनाया। जो पिता की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहा है। ट्रस्ट के सचिव गौतम सुखलेचा ने बताया कि यह संस्था अब तक 350 लोगों के देहदान के लिए पंजीयन करवा चुकी है। समय-समय पर रक्तदान शिविर सहित समाज सेवा के कई कार्य कर रही है। मंगलवार को सुखलेचा की पुत्रवधु विंग कमांडर डॉ. पुखराज सुखलेजा की पत्नी रेखा देवी (70) के निधन के बाद परिवार ने उनका नवां देहदान किया।

परिवार में अब तक इन्होंने किया देहदान

  1. लच्छीराम सुखलेचा (पति)
  2. हंजा बाई सुखलेचा (पत्नी)
  3. पानी गन्ना (पुत्री)
  4. रेखा सुखलेचा (पुत्रवधु)
  5. निर्भय सुखलेचा (भतीजा वधु)
  6. भंवर लाल (भतीजा)
  7. मोहन लाल (समधी)
  8. कोयल बाई (समधी पत्नी)
  9. विमल लसोड़ (समधी)

टॉपिक एक्सपर्ट … डॉ. प्रवीण ओझा, प्रभारी, एनोटॉमी विभाग, आरएनटी मेडिकल कॉलेज

मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को मनुष्य के शरीर की संरचना के अध्ययन के लिए मानव देह की आवश्यकता होती है। एनएमसी के नियमानुसार प्रत्येक दस विद्यार्थियों को एक ह्यूमन बॉडी की प्रति वर्ष जरूरत होती है। इसके अलावा पीजी स्टूडेंट्स को भी सर्जरी सहित अन्य अध्ययन के लिए जरूरत होती है। यह मानव देह मेडिकल कॉलेजों को देहदान के माध्यम से प्राप्त होती है। अब सरकार भी लोगों को देहदान के लिए प्रेरित कर रही है। इसकी प्रक्रिया भी बहुत आसान कर दी गई है। उदयपुर के सुखलेचा परिवार का ट्रस्ट भी इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहा है।

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