रियल एस्टेट कारोबार के लिए अच्छे संकेत : लेकसिटी में लोगों ने तलाशने शुरू किए नए आशियाने

बदली चाहत...अब घर चाहिए रेडी टू शिफ्ट, 2 बीएचके पहली पसंद

By: Mukesh Kumar Hinger

Updated: 24 Jun 2020, 12:11 PM IST

प्रापर्टी पर सबसे बड़ा ट्रेंड. सर्वे: अनलॉक 1.0 के बाद राजस्थान में प्रापर्टी बाजार के हाल समझने के लिए पत्रिका ने प्रदेश के सभी बड़े शहरों में सर्वे कराया। वीडियो कांफ्रेंसिंग से निजी डवलपर्स, उपभोक्ताओं और हाउसिंग बोर्ड के अफसरों से बात कर यह नतीजे निकाले। आप भी समझें क्यों और कैसे करवट ले रहा है अपने सपनों के घर का यह बाजार...

जयपुर/उदयपुर. दो गज की दूरी का नियम लोग अपने घरों में भी लागू करने जा रहे हैं। यही वजह है कि कोरोना महामारी से बचने के लिए अब लोगों ने नए आवासों की तलाश भी शुरू कर दी है। प्रापर्टी बाजार का सबसे बड़ा ट्रेंड यह निकलकर आया है कि राजधानी के परकोटा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शहर के दूसरे नव विकसित इलाकों में आवास देखना और खरीदना शुरू कर दिया है। झीलों की नगरी उदयपुर में भी घर का सपना साकार करने के लिए लोग प्रोजेक्ट तक पहुंचे और विजिट कर पूरी जानकारी जुटा रहे है तो कुछ ने बुर्किंग भी कराई है। वैसे अब तक यह माना जाता था कि परकोटा के बाशिंदे अपने क्षेत्र से बाहर रहना पसंद नहीं करते। यही हाल जोधुपर, कोटा और अजमेर सहित अन्य शहरों का भी है। अब अनलॉक में आवासों के ताले खुलना शुरू हो गए हैं।

कोरोना का असर
रियल एस्टेट जानकारों की माने तो जयपुर के बाहरी हिस्से में परकोटे से आवास देखने और खरीदने के लिए 60 फीसदी लोग पहुंच रहे हैं। पहले परकोटा के लोगों को बाहर की दिनचर्या रास नहीं आती थी, अब परिवार के कुछ सदस्य बाहर रहने का मन बना रहे हैं।

ऑफर की भी कमी नहीं
निजी बिल्डरों की बात करें तो पजेशन तक ईएमआई देने का वादा, मॉड्यूलर किचन और वार्डरोब या फिर कुल कीमत का 10 फीसदी डिस्काउंट तक देने की बात कह रहे हैं।
राजस्थान आवासन मंडल तो आवास की कीमत का 10 फीसदी जमा कराकर गृह प्रवेश करा रहा है। शेष राशि 13 साल में किश्तों के रूप में ले रहा है। राज्यभर के अधिशेष मकानों को 50 फीसदी तक की छूट के साथ बेच रहा है।

ग्राहकों की मांग
रेडी टू मूव को प्राथमिकता
टू—बीएचके की डिमांड ज्यादा
25 प्रतिशत
थ्री बीएचके भी करा रहे बुक
20.30 लाख
रुपए के बीच का बजट
60 लाख रुपए
तक के विला को भी वरीयता
प्रवासियों को भा रहे सरकारी अफोर्डेबल प्रोजक्ट्स

उदयपुर केस 01
शहर के बीच कुम्हारवाड़ा में रहने वाले कल्पेश पोरवाल शहर के अंदर से बाहर शिफ्ट हो रहे है। उन्होंने ओकेजन गार्डन के पास फ्लेट लिया और इसी सप्ताह शिफ्ट होंगे। वे कहते है कि शहर में जाम की नौबत है और वहां चारपहिया वाहन रखने की जगह भी नहीं है, जिस सोसायटी में आ रहे अच्छा लगी।
उदयपुर केस 02
मुंबई से गत वर्ष उदयपुर आए सुनील चोरडिय़ा ने भी फ्लैट की बुकिंग कराई। वे वैसे अभी तो यहां दूसरी जगह रह रहे है लेकिन अच्छी सोसायटी में घर ढूंढ रहे थे। अनलॉक होते ही उन्होंने मीरा नगर में एक नए प्रोजेक्ट में फ्लैट की बुकिंग करवा दी।

उदयपुर : फ्लैट को प्राथमिकता
ग्राहक फ्लैट खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। प्राथमिकता कम बजट का आवास खरीदना है। प्रवासी राजस्थानी या फिर दूसरे राज्यों के लोग भी कम बजट के फ्लैटों में रुचि दिखा रहे हैं। जून में पांच करोड़ रुपए की आय रजिस्ट्री के माध्यम से हुई है।


जोधपुर : 25 फीसदी तक मिल रही छूट
कुछ दिनों में 100 से अधिक आवास बिके हैं। आवासन मंडल के फ्लैट खरीदने में भी लोगों ने रुचि दिखाई है। निजी डवलपर्स बुकिंग के साथ 25 फीसदी तक छूट दे रहे हैं। पुराने शहर की बात करें तो कई ग्राहक रेडी टू पजेशन मकानों में भी रुचि दिखा रहे हैं।


अजमेर : फ्लैट नही मकान पंसद
अजमेर में लोग फ्लैट की बजाय शहर के बाहरी हिस्से में मकान खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। लॉकडाउन के बाद से एडीए अब तक एक भी भूखंड नहीं बेच पाई है। राजस्थान आवासन मंडल अजमेर, ब्यावर और किशनगढ़ में 100 से अधिक मकानों को बेच चुका है।


कोटा : नई योजना का इंतजार
यहां महज 15 फीसदी रियल एस्टेट बाजार रह गया। बिल्डरों के फ्लैट नहीं बिक रहे हैं। वहीं, कोटा नगर विकास न्यास की उम्मेदगंज के पास करीब 1500 भूखंड की योजना अटक गई है। वहीं राजीव गांधी आवासीय योजना में भी खरीदारों ने राशि जमा नहीं कराई।

अनलॉक के बाद हमारे यहां काम शुरू हो गया है। आवासीय प्रोजेक्ट में विजिट भी बढ़ी है, रेस्पांस अच्छा मिल रहा है। पूरी उम्मीद है कि नवरात्र और दिवाली पर अच्छी संख्या में गृह प्रवेश होगा।
-दिनेश कोठारी, चेयरमैन, क्रेडाई-उदयपुर इकाइ

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