धर्म प्रेरित आत्मा में उन्माद में आकर शैतान बन सकती है

धर्म प्रेरित आत्मा में उन्माद में आकर शैतान बन सकती है

Sushil Kumar Singh Chauhan | Updated: 04 Jul 2019, 10:18:00 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने धर्मसभा में व्यक्त किए विचार

उदयपुर. धर्म के मार्ग पर चलने वाली आत्मा में भी कभी उन्माद पैदा हो सकता है। ऐसे में उस व्यक्ति के भीतर ज्ञान और विवेक का दीपक बुझ जाता है। उन्माद में पागलपन का भूत सवार हो जाता है। उसके वशीभूत होकर धार्मिक कहलाने वाली आत्मा भी शैतान के रूप में परिवर्तित होकर पतन का मार्ग चुन लेती है। साथ ही पूरे माहौल को विषाक्त बना देती है। ये विचार अहिंसापुरी जैन स्थानक में गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आत्मा नास्तिक से अनंत गुना खतरनाक होती है। नास्तिक खुद का नुकसान करता है, लेकिन धार्मिक उन्मादी आत्मा पूरे विश्व को खतरे में डाल सकती है। मुनि कमलेश से कहा कि उन्माद और धार्मिकता में 36 का आंकड़ा है। विश्व के सभी धर्मों ने एक स्वर में उन्माद को अधर्म पाप और पतन का कारण बताया है, जिसमें उन्माद सवार होता है। उससे उसमें रहे हुए सभी सद्गुण नष्ट हो जाते हैं। उसके कारण मानसिक तनाव से असाध्य रोगों का शिकार हो जाता है। ब्लड प्रेशर, हार्ड अटैक, ब्रेन हेमरेज जैसे रोगों को खुला निमंत्रण देता है। वह सबके लिए नफरत का पात्र बनता है। जैन संत ने बताया कि उन्माद ही हिंसा की जननी है। उसकी ज्वाला अणु बम व परमाणु बम से भी खतरनाक है। उन्माद को समाप्त करने के लिए सरकार विज्ञान और डॉक्टर के पास कोई साधन नहीं है। सिर्फ महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान का चिंतन मनन श्रवण ही अंकुश लगा सकता है। उन्होंने बताया कि उन्मादी व्यक्ति को भगवान में भी शैतान नजर आएंगे। धार्मिकता में पाखंड नजर आएगा। इंसान ही इंसान के खून का प्यासा बन जाएगा। उन्माद अपने आप में अधर्म तथा नर्क का द्वार है। स्वर्ग जैसा जीवन भी नरक में परिवर्तित हो जाता है। जूना अखाड़ा के महंत सेवादास घनश्याम मुनि ने भी इस मौके पर विचार व्यक्त किए। अहिंसा पुरी जैन स्थानक की ओर से सावत संघ और महिला मंडल ने दीक्षार्थी शंकर का अभिनंदन किया। मुनि ने शुक्रवार को गाडिय़ां दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए यहां मंगलमय विहार किया।

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