कॉम्बिनेशन की दवा आरएनटी में रिजर्व, जरूरत पर तत्काल ला सकेंगे उपयोग में

- जयपुर एसएमएस में उपयोग कर किया था युवकों को सुरक्षित - आरएनटी में भी पूरी तैयारी

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. लेकसिटी में आने वाले पर्यटकों की तादात देखते हुए प्रशासन से लेकर चिकित्सा विभाग बेहद गंभीर हो गया है। आरएनटी मेडिकल प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी से कोरोना से लड़ाई के लिए कमर कस चुका है। इसी कड़ी में आरएनटी ने उन तीनों दवाओं की खैप को पूरी तरह से तैयार कर रखा है, जिससे जयपुर के एसएमएस में कोरोना संक्रमित मरीजों को ठीक किया गया था।

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इसलिए तैयारी

दुनिया में कोरोना का कहर जारी है। दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार करने में फिलहाल एक साल लगेगा, लेकिन राजस्थान ने कोरोना को हराकर सभी को चौंका दिया है। यहां सवाईमानसिंह, एसएमएसद्ध अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने स्वाइन फ्लू, मलेरिया और एचआईवी की दवा देकर कोरोना से पीडि़त तीन मरीजों को ठीक कर दिया था, वहीं जयपुर निवासी 24 वर्षीय एक मरीज का इलाज जारी है।

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ये है दवा का पूरा गणित

जो दवा जयपुर में कोरोना संक्रमित मरीजों को दी गई, उसमें दो एंटीवायरल व एक प्रोटाजुटा जनित बीमारियों के उपचार में उपयोग की जाने वाली थी।

- मलेरिया की दवा: क्लोरोक्विन इसमें यह मलेरिया के साथ-साथ प्रोटोजुआ जनित बीमारियों में भी इस्तेमाल होता है। मलेरिया में प्लाज्मोडियम होता है, यह प्रोटोजुआ जनित है।

- स्वाइन फ्लू: आसेल्टामिविर: यह एंटीवारयल है, फ्लू के लक्षण लाने वाले वायरस पर ये दवा असर करती है। एच वन एन वन

- एचआईवी- इसमें रोपिनाविर, रिटोनाविर, इंडिनाविर होता है। ये दवा भी एंटीवायरल है। एड्स के लिए काम में ली जाने वाली दवा में इसका उपयोग किया जाता है।

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एसएमएस के डॉक्टर्स ने कोरोना पॉजिटिव इटली निवासी महिला को लोपिनाविर 200 एमजी, रिटोनाविर 50 एमजी का डोज दिन में दो बार दिया गया।

- इटली के ही 69 वर्षीय और जयपुर के आदर्श नगर निवासी 85 वर्षीय बुजुर्ग को स्वाइन फ्लू में दी जाने वाली ओसेल्टामिविर और मलेरिया में इस्तेमाल होने वाली दवा क्लोरोक्विन दी। इन दवाओं के कॉम्बिनेशन का ही परिणाम रहा कि तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

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अन्य राज्य और अमरीका भी मांग रहा जानकारी

- आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ लाखन पोसवाल ने बताया कि अमरीका में लगातार कोरोना का एंटी डोट तैयार करने पर काम किया जा रहा है, ऐसे में जैसे ही कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के ठीक होने की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन तक पहुंची तो इस दवा को लेकर अमरीका ने भी रुचि दिखाई है।

- विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थानीय प्रभारी डॉ अक्षय व्यास ने बताया कि जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है, ज्यादातर मरीज सामने आ रहे हैं और मृत्यु भी हो रही है, ऐसे में अब ये राज्य जयपुर में इस्तेमाल की गई इस दवा की जानकारी जुटा रहे हैं

- खास बात ये कि ये तीनों प्रकार की दवाएं राज्य सरकार के नि:शुल्क दवा काउंन्टर पर उपलब्ध हैं।

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पहले भी आपदाओं में ये दवा काम में आ चुकी है...

- सार्स: सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम अथवा सार्स, नवम्बर 2002 और जुलाई 2003 के बीच दक्षिणी चीन में सार्स रोग प्रकोप का प्रकोप शुरू हुआ था, इसमें विभिन्न देशों में 8273 लोग संक्रमित हुए एवं 775 लोगों की मृत्यु हो गयी थी। इसमें सबसे अधिक संख्या हाँगकांग की रही। डब्ल्यूएचओ के अनुसार ये चंद सप्ताह में 37 देशों के व्यक्तियों में फैल गया था, इसके उपचार के लिए भी पहले एचआईवी में दी जाने वाली दवा लोपिनाविर, रिटोनाविर को इस्तेमाल किया गया था। चीन, हाँगकांग, कनाडा, ताइवान, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया, फि़लीपीन्स, थाईलैंड, फ्रांस और दक्षिण अफ्र ीका में फैला था।

- मर्स: मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम मर्स मनुष्यों में संक्रमण करने वाला वायरस है। मर्स के मरीजों में आमतौर पर बुखार, निमोनिया और खराब किडनी जैसी लक्षण पाए जाते हैं। यह पहली बार सउदी अरब में पाया गया। सऊदी अरब ने मर्स से संक्रमित होने वाले 100 से अधिक मरीजों की मौत हुई थी, ये बीमारी 2012 में सामने आई थी, इसमें भी लोपिनाविर, रिटोनाविर का इस्तेमाल किया गया था।

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दवा के उपयोग से पहले आईसीएमआर की अनुमति

इस दवा के उपयोग से पहले चिकित्सकों ने बकायदा मरीज से लेकर आईसीएमआर यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की अनुमति ली गई थी।

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ये है राज्यों के हाल - 17 मार्च

राज्य- कन्फर्म केस भारतीय- कुल कन्फर्म विदेशी-डिस्चार्ज- मृत्यु

राजस्थान-2-2-3-0

आन्ध्रप्रदेश-1-0-0-0

दिल्ली-8-0-2-1

हरियाणा-1-14-0-0

कर्नाटक-11-0-0-1

केरल- 24-2-3-0

महाराष्ट्र- 36-3-0-1

ओडिशा-1-0-0-0

पंजाब-1-0-0-0

तमिलनाडु-1-0-0-0

तेलंगाना-3-2-1-0

जम्मू कश्मीर-3-0-0-0

लद्दाख-6-0-0-0

उत्तरप्रदेश- 14-1-5-0

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दवा की पूरी उपलब्धता चिकित्सालय में हैं, इसकी पूरी तैयारी हमने कर ली है, जरूरत पर दवा का उपयोग किया जा सकेगा।

डॉ आरएल सुमन, अधीक्षक महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर

bhuvanesh pandya Reporting
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