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बच्चों की किताबों पर कमीशन का काला खेल, जिले में एक वर्ष में 7 से 20 करोड़ रुपए तक की दलाली

पत्रिका टीम बनी निजी स्कूल संचालक और पहुंची बुक स्टोर पर तो खुल गई कलईनिजी स्कूल अभिभावकों की जेब से जमकर काट रहे हैं चांदीबुक स्टोर वाले खुलकर कर रहे हैं डिस्काउंट तले कमीशन का ऑफर
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भुवनेश पण्ड्या/चंदनसिंह/मोहम्मद इलियास/उदयपुर. बच्चों के भविष्य में नाम पर जिले में दलाली का खेल रहा है। स्कूलों में प्रवेश का दौर जारी है और इस शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पाठ्यपुस्तकों, स्टेशनरी व ड्रेस पर करीब 15 से 20 करोड़ रुपए की दलाली का दांव लग सकता है। पत्रिका टीम ने बुधवार को कहीं स्कूल संचालक तो कहीं स्टेशनरी विक्रेता बनकर स्टिंग ऑपरेशन किया तो दलाली के इस खेल की पूरी परते उधड़ती गई। स्कूल संचालक बनकर गई पत्रिका टीम कहीं स्टेशनरी व पुस्तक विक्रेता ने 25 से 35 प्रतिशत तो कहीं 40 प्रतिशत तक कमीशन का ऑफर दिया। वहीं, स्टेशनरी संचालक बनकर स्कूलों में पहुंचे तो वहां भी सिवाय कमीशन के अलावा कोई बात नहीं हुई। न्यूनतम गुणा-भाग करें तो भी कमीशन करीब पौने आठ करोड़ रुपए बैठ रहा है। पत्रिका टीम- चंदन सिंह देवड़ा, भुवनेश पण्ड्या, मोहम्मद इलियास (सभी वीडियो/ऑडियो पत्रिका के पास उपलब्ध )

अभिभावक बेबस, बच्चों के भविष्य का सवाल

दृश्य एक/बापूबाजार
पत्रिका टीम सबसे पहले बापू बाजार स्थित एक बुक स्टोर पर पहुंची, यहां टीम ने बताया कि पांचवीं तक एक नई स्कूल खोली गई है, इसके लिए बच्चों को किताबों की जरूरत है, क्या खर्च आएगा, क्या स्थिति रहेगी। मौजूद बुजुर्ग ने बच्चों की संख्या पूछी और बताया कि अंग्रेजी माध्यम की किताबे मिल जाएंगी, लेकिन अभी उपलब्ध नहीं करवा पाऊंगा, इस पर पत्रिका रिपोर्टर ने पूछा कि यदि आपके यहां से किताबें खरीदी तो स्कूल को क्या मिलेगा? (इशारों में कमीशन की बात की) इस पर संचालक बोले कि जो दूसरो को देते हैं 20 से 25 प्रतिशत वह आपको भी देंगे। जल्दी हो तो आप आरएमवी मार्ग स्थित बुक स्टोर से सम्पर्क कर सकते हो।


दृश्य दो/आरएमवी मार्ग
इसके बाद पत्रिका टीम पहुंची आरएमवी मार्ग यहां एक बुक स्टोर पर संचालिका किताबे बेच रही थी, उसे नए स्कूल खोलने की बात कहते ह़ुए किताबों के सेट उपलब्ध करवाने को कहा तो पूछा की यहां आकर ले जाओगे या हमें वहां काउंटर लगाना है। बातचीत के बीच संचालक आ गए तो उनसे बात करने के लिए ऑफिस में बुलाया। संचालक ने पूछा की 100 बच्चों का एडमिशन हो गया है तो किताबें उपलब्ध करवा देंगे 35 प्रतिशत दे देंगे और इससे कम बच्चे हुए तो 25 प्रतिशत ही मिलेगा। अगर सभी बच्चों की किताबों का पैसा आप एकत्रित कर एक साथ देते हो तो 40 प्रतिशत तक डिस्काउंट मिल जाएगा। टीम ने दो दिन में जवाब देने की बात कही।


कमीशन इतना आप सोच भी नहीं सकते.....
स्टिंग ऑपरेशन में किताबों की आड़ में कमीशन से जुड़े खेल की जो बाते हमारे सामने आई उसका अंदाजा आप लगा कर चौंक जाएंगे।

कमीशन के खेल को इस गणित से भी समझ सकते है

जिले में कुल 937 प्राइवेट स्कूल है, जो आरटीई के तहत पात्र है। इसमें 742 प्राइमरी जबकि 195 सैकण्डरी स्कूल हैं। यदि एक स्कूल में 100 बच्चे ही किताबे खरीदते हैं तो 93 हजार 700 बच्चे होते हैं। औसतन 2 से पांच हजार की किताबें एक बच्चे की होती हैं। ऐसे में 25 प्रतिशत कमीशन गिना जाए तो करीब नौ करोड़ रुपए होते हैं। इससे अधिक 35 प्रतिशत कमीशन के अनुसार ये आंकड़ा 13 करोड़ रुपए होता है। ये आंकड़ा इतना बड़ा है कि कोई अभिभावक वहां तक की सोच भी नहीं सकता है। इसके अलावा अन्य स्टेशनरी, बस्तों व कपड़ों के खर्च की बात तो अलग ही हैं।


पीडि़त हैं तो हमें बताएं
अभिभावक खुलकर करें शिकायत। अगर आप भी हैं स्कूल या यूनिफॉर्म दुकानदारों से पीडि़त तो हमें बताएं इस नम्बर पर 99280-91157, 99829-92671 (अभिभावक चाहेंगे तो उनके नाम गुप्त रखे जाएंगे)


कोई भी स्कूल किसी को भी पाबंद नहीं कर सकता कि किताबें किसी विशेष बुक स्टोर या दुकान से खरीदे। इसे लेकर अभिभावक सीधे तौर पर डीईओ कार्यालय में शिकायत कर सकता है और स्कूल को भी अपनी शिकायत देकर यहां कॉपी दे सकता है। कुछ स्कूलों की शिकायत मेरे पास भी पहुंची है। - शिवजी गौड, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी उदयपुर