उदयपुर . शिल्पग्राम में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव पर मुक्ताकाशी रंगमंच पर किशनगढ़ का चरी नृत्य, आेडीशा का संबलपुरी नृत्य, असम का बिहू तथा मराठी लावणी ने अपनी विविध नृत्य शैलियों की अनुपम छटाएं बिखेरीं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत किशनगढ़ की गुर्जर महिलाओं की ओर से विभिन्न अवसरों पर किए जाने वाले ‘चरी नृत्य’ से हुई। ढोल की धमक और बांकिये की टेर के साथ नर्तकियों ने सिर पर धातु के पात्र में अग्नि प्रज्वलित कर सौम्य अंदाज में अपने नर्तन की छाप छोड़ी। इसके बाद ‘वीर वीरई नटनम’ तथा आेडीशा का संबलपुरी नृत्य दर्शकों के लिए रोमांचकारी अनुभूति वाला रहा।

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