शिल्पग्राम उत्सव : संडे बना फन डे, शहरवासियों संग सैलानियों की भीड़ उमड़ी, होजागिरी और गोटीपुवा के हैरतअंगेज करतब देखे

शिल्पग्राम उत्सव : संडे बना फन डे, शहरवासियों संग सैलानियों की भीड़ उमड़ी, होजागिरी और गोटीपुवा के हैरतअंगेज करतब देखे

Rakesh Sharma Rajdeep | Updated: 25 Dec 2017, 07:07:42 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

-पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव रविवार को छुट्टी के दिन उमड़ी भीड़ से चहक उठा।

उदयपुर . पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव रविवार को छुट्टी के दिन उमड़ी भीड़ से चहक उठा। लोकरंग के इस वृहद मेले में एक ओर शहरवासियों संग देशी-विदेशी सैलानियों ने जमकर हस्त शिल्प की खरीदारी की, वहीं वे पारम्परिक लोक कलाकारों के संग ठुमके लगाते और स्वादिष्ट व्यंजनों के चटखारे लेते देखे गए।

 

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मेले की सर्द शाम का आगाज मुक्ताकाशी कलांगन पर गोवा के समई नृत्य से हुआ। इसके बाद जम्मू के रौफ नृत्य पर दर्शक झूम उठे। कार्यक्रम में त्रिपुरा का ‘होजागिरी नृत्य’ सबसे लुभावनी प्रस्तुति रहा। इसमें त्रिपुरा की रियांग समुदाय की महिलाओं ने मंथर गायन के साथ शीश पर बोतल संतुलित करते हुए हाथों में तश्तरियां लेकर कई करिश्माई संरचनाएं बना कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

 

इस अवसर पर ही आेडीशा के बाल नर्तकों ने आेडीसी शैली के गोटीपुवा नृत्य में विभिन्न दैहिक भंगिमाओं का उत्कृष्ट अंदाज में दर्शाया। इसके अलावा उत्तरप्रदेश का डेडिया, असम को भोरताल, जयपुर की हास्य झलकी, महाराष्ट्र की लावणी ने अलग रंगत जगाई। हाट बाजार में वस्त्र संसार, जूट संसार, अलंकरण, विविधा आदि में खरीदारों की खासी रौनक रही। सम झोपड़ी से आगे खुर्जा पॉटरी के शिल्पियों के पास रंग-बिरंगे कप तश्तरी, केटली, सोप केस, बॉटल, फ्लावर पॉट आदि लोगों की पसंद का हिस्सा बने रहे। इसी तरह, खाने-पीने के शौकीन लोग परिजनों और मित्रों संग अमरीकन भुट्टे, मक्की की पापड़ी, राब, हरियाणा का जलेबा, दूध फीणी, दिल्ली की चाट आदि का आस्वादन करते देखे गए।

 

दिनभर मेलार्थियों से अटा रहा प्रांगण
उत्सव के चौथे दिन रविवार की छुट्टी के चलते हाट बाजार में दोपहर बाद और शाम ढलते बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्कूल-कॉलेजों में बड़े दिन और शीतकालीन अवकाश आरंभ हो जाने से भी मेले की रौनक कई गुणा बढ़ गई। मेले में घूमते बहुरूपिए, गवरी कलाकारों के पुतले, हर जगह पारम्परिक लोक कलाओं का प्रदर्शन करते कलाकार किशोरों तथा युवाओं के मोबाइल कैमरों की रिकॉर्डिंग और सेल्फी का केंद्र बिंदू बने नजर आए।

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