शिल्पग्राम उत्सव में अंतिम चरण में बढ़ी मेलार्थियों की रेलमपेल, संबलपुरी, छापेली, लावणी और बिहू ने मनमोहा

शिल्पग्राम उत्सव में अंतिम चरण में बढ़ी मेलार्थियों की रेलमपेल, संबलपुरी, छापेली, लावणी और बिहू ने मनमोहा

rajdeep sharma | Updated: 29 Dec 2017, 01:21:35 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

आठवें दिन रंगमंच पर किशनगढ़ का चरी नृत्य, आेडीशा का संबलपुरी नृत्य, असम का बिहू तथा मराठी लावणी ने अपनी विविध नृत्य शैलियों की अनुपम छटाएं बिखेरीं।

उदयपुर . शिल्पग्राम में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव के आठवें दिन गुरुवार को मुक्ताकाशी रंगमंच पर किशनगढ़ का चरी नृत्य, आेडीशा का संबलपुरी नृत्य, असम का बिहू तथा मराठी लावणी ने अपनी विविध नृत्य शैलियों की अनुपम छटाएं बिखेरीं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत किशनगढ़ की गुर्जर महिलाओं की ओर से विभिन्न अवसरों पर किए जाने वाले ‘चरी नृत्य’ से हुई। ढोल की धमक और बांकिये की टेर के साथ नर्तकियों ने सिर पर धातु के पात्र में अग्नि प्रज्वलित कर सौम्य अंदाज में अपने नर्तन की छाप छोड़ी। इसके बाद ‘वीर वीरई नटनम’ तथा आेडीशा का संबलपुरी नृत्य दर्शकों के लिए रोमांचकारी अनुभूति वाला रहा।

 

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लोकरंग में शास्त्रीय तत्वों के मिश्रण के साथ मराठी लावणी नृत्यांगनाओं ने अपनी मोहक अदाकारी से दर्शकों के साथ अनूठा संवाद स्थापित किया। इसमें नर्तकियों के पदाघातों तथा भाव सम्प्रेषणता की उत्कृष्ट बानगी देखते ही बनती थी। इसी तरह, हिमाचल के ‘सिरमोरी नाटी’ में स्थानीय युवक-युवतियों के प्रेम तथा त्योहारी रंगत की सुहावनी पेशकश और असम के बिहू नृत्य में शंख, पेंपा की तान के बाद ढोल की थाप पर दैहिक नृत्य भंगिमाओं ने दर्शकों को मोह लिया।

समापन से पूर्व पंजाब के भांगड़ा ग्रुप ने जोशीली प्रस्तुति और गुजरात के सिद्दी नर्तकों ने बाबा गौर की उपासना में की जाने वाली धमाल में अपनी थिरकन से सभी का दिल जीत लिया।

 

शिल्प और खाने-पीने के कद्रदान की मौज

शिल्पग्राम उत्सव के अंतिम चरण में कलात्मक वस्तुओं के खरीदारों और खाने-पीने के कद्रदानों की रेलमपेल नजर आने लगी है। हाट बाजार में हस्तशिल्प उत्पादों से सजी स्टॉल्स पर मेलार्थी अपनी पसंद और जरूरत मुताबिक खरीदारी में मशगूल दिखाई देते हैं। मौसम के हिसाब से गर्म कपड़ों की खरीद-फरोख्त अधिक जोर पर है, वहीं लजीज व्यंजनों के मुरीदों का जमावड़ा मेला प्रांगण में लगी फूड स्टॉल्स के आसपास देखा जा सकता है।

कई स्पेशल आयटम बने हैं मेले की जान

बोलती रामायण, कश्मीरी गर्म शॉल, डेकोरेटिव फ्लॉवर पॉट्स, सुंदर कढ़ाई व कशीदा किये हुए बेड कवर, सहारनपुर फर्नीचर, खुर्जा पॉटरी, कागज के लेम्प शेड्स, टेराकोटा पैनल्स सहित विभिन्न धातुओं में ढली सुंदर प्रतिमाएं मेले की जान और शान है।

 

लजीज व्यंजनों की सौंधी महक

लखनऊ के पाक शिल्पी वाहिद की स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के अलावा राजस्थानी खाने में मक्की की रोटी, ढोकले, गर्म राब, दाल-बाटी, हरियाणवी देशी घी का जलेबा, पंजाबी भोजन में मक्के की रोटी संग सरसों का साग व अमृतसरी नान, १६ मसालों में पेरी-पेरी चिली गारलिक चकरी आलू राह चलते लोगों को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं।

 

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