सोशल डिस्टेंसिंग: आदिवासी परंपरा से सीखें नायाब तरीके

आदिवासी बखूबी कर रहे लॉकडाउन नियमों की पालना

By: surendra rao

Published: 06 Apr 2020, 06:11 PM IST

उदयपुर. कोटड़ा/झाडोल. लॉडाउन के चलते बाजार एवं छोटे-छोटे कस्बे तक बंद होने के साथ ही शहरी एवं पढ़े लिखे लोग सोशल डिस्टेंस बनाते हुए अपने अपने घरों में रह रहे हैं। वहीं भीड़भाड़ से दूर जंगलों व खेतों में रहकर असली लॉकडाउन की पालना आदिवासी अंचल के लोग कर रहे हैं। हालांकि इनका कुछ तरीका अलग है जब से लोक डाउन की घोषणा हुई है तब से सुदूर आदिवासी इलाकों में रहने वाले आदिवासी लोगों ने अपनी जरूरत की खाद्य सामग्री खरीदने के लिए आसपास की किराणा दुकानों से सामान की खरीदारी कर रहे हैं। स्थानीय कस्बे की भीड़भाड़ एवं अन्य समाज के लोगो से मिलना जुलना बन्द कर अपने अपने घरों में सुरक्षित रह रहे हैं। शहरों की तुलना में गांव सुनसान है। हमेशा की तरह कोई चहल पहल नहीं है। लोग अपने खेतों में खड़ी फसलों को काटने में व्यस्त हैं और अनजान लोगों से दूरी बनाकर रह रहे हंै। झाड़ोल कस्बे के निकट बेरणा गांव में पूनमचन्द खराड़ी, नवलचन्द खराड़ी, अम्बालाल, पूनाराम, जालमचन्द एवं धर्मचन्द डूंगरी ने बताया कि इस महामारी से लडऩे के लिए किसान अधिकतम समय फसलो की कटाई करते हुए खेतों में बिता रहे हैं।
दूर रह काट रहे फसल
उदयपुर जिले की गिर्वा तहसील के कई गांवों में किसानों द्वारा अपने खेतो में काम करते हुऐ सोशल डिस्टेसिंग की पालना कर रहे है। खेतों में दूर-दूर रहकर फसलें काट रहे है। यह सोशल डिस्टेंसिंग का अपने आप में नायाब तरीका है।
&गांवों के लोग घरों या अपने खेतों में फसल काटने में व्यस्त है। भीड़भाड़ से दूर रहकर सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन कर रहे हैं।
जयश्री, सरपंच कोटड़ा
&राशन की दुकानों पर भी आ रहे किसानों को सोशल डिस्टेंसिंग की पालना के लिए बता रहे हैं। साथ ही पेंशन वितरण भी बीसी प्वाइंट द्वारा घर-घर जाकर वितरण करवा रहे हैं। गावं में जाकर माइक द्वारा एलाउंस कर डिस्टेंसिंग की पालना के लिए अपील करवा रहे हैं। घर घर जाकर डिस्टेंसिंग के बारे में जानकारी दे रहे है।
-सुरेश मेहता, तहसीलदार, झाड़ोल
&कस्बों को छोड़कर गावों में भौगोलिक दृष्टि से आदिवासी समुदाय के लोग भीड़भाड़ से दूर जंगलों एवं पहाडिय़ों पर मकान या झोपड़ी बनाकर रहता है। यह सोशल डिस्टेंसिंग का यह बेहतर उदाहरण है। यहां लोग काफी सुरक्षित है।
-मंगलाराम पूनिया, एसडीएम

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