दुर्घटना में हुई मां की मौत, अब मौत पर छाया सामाजिक कुरीति का साया, मूकबधिर बहन व नेत्रहीन भाई पर टूटा मुसीबतों का पहाड़

दुर्घटना में हुई मां की मौत, अब मौत पर छाया सामाजिक कुरीति का साया, मूकबधिर बहन व नेत्रहीन भाई पर टूटा मुसीबतों का पहाड़

madhulika singh | Publish: Mar, 14 2018 05:03:08 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर.सामाजिक इस कुरीति से निपटने के लिए परिवार- रिश्तेदार बार-बार प्रशासन व लोगों से मदद की गुहार कर रहे थे।

उदयपुर . मूक बधिर बहन और आंखों की रोशनी गंवा चुके जवान भाई की सिसकियों व रूदन में मां का साया सदा के लिए सिर से उठ जाने की टीस तो थी लेकिन थोड़ी-थोड़ी देर में दहाड़े मारकर रोने के पीछे का दर्द मां की मौत से भी भारी था। लाचार भाई व रिश्तेदार इस बात को लेकर परेशान थे कि मां के अर्थी को सजाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे और उसकी अब बारह दिन तक घर आने वाले समाज बिरादरी के लोगों को वे क्या खिलाएंगें। सामाजिक इस कुरीति से निपटने के लिए परिवार- रिश्तेदार बार-बार प्रशासन व लोगों से मदद की गुहार कर रहे थे।

 

 

लालन-पोषण करने वाली मां की मौत

सिगड़ीवाला जाति के इन भाई-बहन का लालन पोषण वृद्ध मां रामप्यारी (57) पत्नी गोटूजी कर रही थी। रामप्यारी की मंगलवार को एमबी चिकित्सालय में उपचार के दौरान मौत हो गई। वृद्धा को टीडी बसस्टैण्ड पर एक ट्रक ने चपेट में ले लिया था, उसे सिर में गहरी चोट लगी थी। टीडी थानापुलिस ने मंगलवार को शिनाख्तगी के बाद शव परिजनों के सुपुर्द किया।


मसाले बेचकर चला रही थी परिवार
मृतका रामप्यारी गंाव-गांव में मसाले, जीरा, सौंफ आदि बेचकर घर का गुजारा चलाती थी, कभी नेत्रहीन बेटे पिटोस व मूकबधिर बेटी पूजा के आसरे कोई उसे भिक्षा भी दे देता था। माया का साया उठने के बाद बच्चों के सिर माथे एक ही परेशानी थी कि अब तंगहाली में सामाजिक कुरीति का सामना कैसे करेंगे।

 

READ ALSO: मेडिकल टीचर्स और रेजिडेंट हुए लामबंद
उदयपुर. ऑल राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन और आरएनटी मेडिकल कॉलेज रेजिडेंट यूनियन सातवें वेतनमान की मांग को लेकर एक बार फिर लामबंद हुआ है। इधर, मांगों को लेकर मंगलवार को यूनियन अध्यक्ष डॉ. राजवीरसिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने चिकित्सा शिक्षा सचिव के नाम आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. डीपीसिंह को ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया कि 27 दिसम्बर को रेजिडेंट एवं सरकार के बीच हुए समझौते के तहत के वेतन को लेकर 25 जनवरी तक एलपीसी रिवाइस करना था। शोध कार्य में गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बावजूद उसे लागू करने से परहेज किया जा रहा है।

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