सोहराबुद्दीन तुलसी एनकांउटर प्रकरण में मुंबई हाईकोर्ट का बड़ा फैसला.. दिनेश एमएन सहित सभी आईपीएस बरी..

सोहराबुद्दीन तुलसी एनकांउटर प्रकरण में मुंबई हाईकोर्ट का बड़ा फैसला.. दिनेश एमएन सहित सभी आईपीएस बरी..

Madhulika Singh | Publish: Sep, 10 2018 02:07:37 PM (IST) | Updated: Sep, 10 2018 02:10:51 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

www.patrika.com/rajasthan-news

मो. इलियास/उदयपुर. बहुचर्चित सोहराबुद्दीन तुलसी एनकांउटर प्रकरण में सोमवार दोपहर को मुंबई हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आईपीएस दिनेश एमएन, सहित सभी आईपीएस अधिकारियों को बरी कर दिया। इनमें आईपीएस डीजी बंजारा, आईपीएस राजकुमार पांडयन, आईपीएस विपुल अग्रवाल के अलावा डीएसपी नरेंद्र अमीन व कांस्टेबल दलपतसिंह शामिल हैं। सभी आईपीएस के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने याचिका दायर की थी जबकि डीएसपी व कांस्टेबल के खिलाफ सीबीआई में याचिका लगाई थी।

सोहराबुद्दीन के भाई ने दायर की थी याचिका

निचली अदालत के सभी पुलिसकर्मियों को आरोपमुक्त करने के बाद छह याचिका दायर की गई थी। जिसमें तीन पुनरीक्षण याचिका सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन ने फैसले के विरोध में डाली। जो गुजरात के पूर्व डीआईजी डी जी वंजारा, आईपीएस अधिकारी राजकुमार पांडियन और आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन के खिलाफ थी। वहीं सीबीआई ने राजस्थान पुलिस के कॉन्स्टेबल दलपत सिंह राठौड़ और गुजरात पुलिस के अधिकारी एनके अमीन के खिलाफ याचिका दी थी। एक याचिका सह-आरोपी गुजरात आईपीएस विपुल अग्रवाल ने दी। अग्रवाल की आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका को पिछले साल निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। विपुल अग्रवाल की याचिका पर भी अलग से सुनवाई की गई।

15 लोग हुए आरोपमुक्त

देश की सबसे बड़ी अदालत उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद ये केस मुंबई की विशेष अदालत में स्थानांतरित हुआ था। जहां 2014 से 2017 के बीच 38 लोगों में से 15 को बरी कर दिया गया। आरोपमुक्त में 14 पुलिस अधिकारी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं। बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बदर ने चार जुलाई के बाद से नियमति आधार पर सुनवाई की।

 

READ MORE : राजीनामे से निपटे 1916 प्रकरण,14.19 करोड़ अवार्ड जारी...तीन पति पत्नी ने फिर थामे हाथ

 

सीबीआई ने मुठभेड़ को फर्जी बताया था

सीबीआई ने देश के सबसे चर्चित एनकाउंटर में से एक रहा सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। सीबीआई के आरोप पत्र के मुताबिक, गुजरात के एक संदिग्ध गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने हैदराबाद के पास से अगवा कर लिया था और उन्हें नवंबर 2005 में एक फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया। सीबीआइ ने दावा किया था राजस्थान पुलिस के कुछ अधिकारियों ने गुजरात और राजस्थान के अधिकारियों के इशारे पर प्रजापति को भी दिसंबर 2006 में अन्य फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। जिन अधिकारियों ने प्रजापति को मारने के निर्देश दिए थे वे पति-पत्नी की हत्या में शामिल थे। जबकि पुलिस का कहना था कि सोहराबुद्दीन के संबंध आतंकियों से जुड़े थे

 

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned