होटल लक्ष्मीविलास का विनिवेश गलत, सरकार के पक्ष में निर्णय

झीलों की नगरी में प्रसिद्ध पांच सितारा होटल लक्ष्मीविलास पैलेस के विनिवेश को गलत मानते हुए आखिर सरकार ने इसे अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

By: santosh

Updated: 17 Sep 2020, 02:00 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
उदयपुर/जोधपुर। झीलों की नगरी में प्रसिद्ध पांच सितारा होटल लक्ष्मीविलास पैलेस के विनिवेश को गलत मानते हुए आखिर सरकार ने इसे अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लक्ष्मीविलास होटल को वर्ष 2004 में महज 7.52 करोड़ विनिवेश करते हुए ललित ग्रुप को सौंप दिया था। जन आक्रोश के बाद सीबीआइ जांच हुई, जिसमें सरकार ने होटल की जमीन की कीमत ही 151 करोड़ रुपए आंकी थी।

इसके बाद से विनिवेश को रद्द करने की मांग लगातार उठती रही लेकिन हर बार दबाया जाता रहा। मामले में सीबीआइ कोर्ट ने फैसला देते हुए होटल को सरकार की सम्पत्ति माना। सरकार के पक्ष में निर्णय के बाद कलक्टर चेतनराम देवड़ा व उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर होटल को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। विनिवेश से पहले होटल के रिनोवेशन पर 2.50 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। ऐसे में केवल 7.52 करोड़ रुपए में सरकारी सम्पति को बेचने पर शहरवासियों ने भारी विरोध किया था। बताया जा रहा है कि अब यह होटल आरटीडीसी को सौंपा जाएगा।

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अदालत ने सीबीआइ की भूमिका पर उठाए सवाल
विनिवेश में पद का दुरुपयोग कर राजकोष को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआइ मामलात की विशेष अदालत ने पूर्व केंद्रीय विनिवेशन मंत्री अरुण शौरी, तत्कालीन सचिव सहित 5 लोगों को गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सीबीआइ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच के दौरान नीलामी में अनियमितता तथा होटल को 244 करोड़ रुपए कम मूल्य में बेचना सामने आ चुका था। फिर भी सीबीआइ की ओर से क्लोजर रिपोर्ट पेश करना विचारणीय है।
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ये 5 लोग तलब
विशिष्ट न्यायाधीश पूरण कुमार शर्मा ने आदेश में कहा कि विनिवेश मंत्रालय के तत्कालीन मंत्री अरुण शौरी, तत्कालीन सचिव प्रदीप बेंजिल, मैसर्स लर्जाड इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष गुहा, कांतिलाल कर्मसे विक्रमसे तथा भारत होटल की निदेशक ज्योत्सना शूरी के खिलाफ प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) डी का अपराध बनना पाया जाता है। उन्होंने फौजदारी प्रकरण दर्ज करने सहित सभी आरोपियों को गिरफ्तारी वारंट से तलब करने के निर्देश दिए।

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अफसर मनमानी दर पर बेचने पर आमादा थे: कोर्ट

सीबीआइ ने एक सूचना के आधार पर 13 अगस्त 2014 को एफआइआर दर्ज की थी लेकिन जांच के बाद पिछले साल क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी। अदालत ने 13 अगस्त 2019 को मामला अग्रिम जांच के लिए दोबारा सीबीआइ को भेज दिया था लेकिन सीबीआइ ने पुराने तथ्यों को दोहराते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी और कहा कि पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने से अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने कहा कि जिन तथ्यों के आधार पर सीबीआइ ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की है, वे मानने योग्य नहीं है। सीबीआइ ने जांच के दौरान भूमि की डीएलसी दर प्राप्त की थी, जो 500 से 1000 रुपए के मध्य थी। इस दर के हिसाब से भूमि की कीमत करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए होना साबित होता है। सरकार के अधिकारियों ने कीमत को नजरअंदाज कर जिस कीमत पर इस होटल को बेचने का निर्णय लिया, उससे यही प्रतीत होता है कि वे सभी भारत होटल लिमिटेड को मनमानी दर पर बेचने पर आमादा थे। नतीजतन करीब 244 करोड़ रुपए की सदोष हानि हुई।
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होटल को किया कुर्क
कोर्ट ने आदेश में कहा कि अपराध से अर्जित संपत्ति मैसर्स लक्ष्मी विलास पैलेस, जिसका वर्तमान नाम दी ललित लक्ष्मी विलास पैलेस है, को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 18 क के तहत कुर्क किया जाना चाहिए। कोर्ट ने होटल को कुर्क करते हुए जिला कलक्टर को रिसीवर नियुक्त करने के आदेश दिए।

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