मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा में कभी थे 2000 से अधिक मंदिर, अब मूर्ति चोरों ने बना रखा है इस क्षेत्र को कमाई का जरिया

Madhulika Singh | Publish: Mar, 02 2019 02:56:45 PM (IST) | Updated: Mar, 02 2019 05:40:36 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

बेशकीमती मूर्तियां गायब, लालच में मिटाया मंदिरों का अस्तित्व

राकेश शर्मा राजदीप/उदयपुर. कभी 2000 से अधिक मंदिरों की नगरी रही मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा में शेष बचे मंदिरों की सरकार ने सुध नहीं ली। नतीजतन यह क्षेत्र मूर्ति तस्करों के लिए कमाई का जरिया बन गया। यहां से अब तक सैकड़ों मूर्तियां तस्कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेच चुके हैं। कई मंदिरों का अस्तित्व तो खजाने की चाह में देखते-देखते ही मिट गया। एक पुल व घरों की दीवार में प्राचीन मंदिरों के पत्थर चुनवा दिए।


चुरा ली नर्तकियों की मूर्तियां

जानकार बताते हैं कि शिव मंदिर खुमान रावल के देवरे में नृत्य मंडप का शिल्प व स्थापत्य कला बेजोड़ थी लेकिन बाद में यहां आठ नर्तकियों समेत गर्भ गृह से शिव की प्रतिमा ही चुरा ली गई। शिल्प कला के नमूने भी लोग उखाड़ ले गए। यही हाल जैन मंदिर का रहा। पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिर के बड़े सभा मंडप से एक साथ लगी 16 नर्तकियों की प्रतिमा गायब कर दी गई।


मंदिर का अस्तित्व ही मिटा दिया

तालाब के पास भी मंदिर के अवशेष था लेकिन वहां बने पुल निर्माण के समय यहीं से पत्थर निकाल लिए गए। पास ही स्थित एक मकान की कच्ची दीवार पर भी मंदिर के पत्थर लगाए गए हैं। अब हालात यह है कि तालाब किनारे मंदिर बिल्कुल नहीं दिख रहा, आसपास अवशेष जरूर पड़े दिखाई दे रहे हैं।

 

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लोगों ने यह भी बताया

क्षेत्रवासियों का कहना है कि 1997 में जब यह मंदिर डूब से बाहर निकला और पुरातत्व विभाग ने इसकी जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया तब आनन- फानन में इस मंदिर में सीमेंट का गर्भ गृह बनाकर किसी ने मूर्ति स्थापित कर दी। बाद में उन्होंने भी इसकी सुध नहीं ली।


सूर्यमंदिर भी

इंटेक प्रतिनिधि महेश शर्मा ने बताया कि मंदिरों की निर्माण शैली 11वीं-12वीं सदी की है। वहीं इसी पहाड़ी की तलहटी में भी दो मंदिर है। इनमें से एक मंदिर चौहानों की कुलदेवी आशापुरा का है। खुमाण रावल का देवरा की पहाड़ी के बायीं ओर जैन मंदिर है। इसे अद्भुत जी का मंदिर कहा जाता है। बघेला तालाब के पेटे में बने मंदिर की शैली देखकर लगता है कि यह सूर्य मंदिर है।

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