लूनी नदी घाटी किनारे मिले पाषाणकालीन औजार व भित्ति चित्र, पुरातत्‍व सर्वेक्षण में आया सामने

- राजस्थान विद्यापीठ के पुरातत्व विभाग ने किया सर्वेक्षण

By: madhulika singh

Published: 17 Sep 2020, 02:17 PM IST

उदयपुर . जोधपुर, सिरोही व पाली जिले में लूनी नदी की घाटी में पुरातात्विक सर्वेक्षण में पाषाणकालीन औजार और ऐतिहासिक भित्ति चित्रों के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

ये औजार व प्रमाण जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के पुरातत्व विभाग की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान मिले हैं। सर्वेक्षण विवि के म्यूजियम क्यूरेटर डॉ. कृष्ण पाल सिंह देवड़ा एवं चिंतन ठाकर की ओर से लॉकडाउन की अवधि में किया गया।

पुरातत्व को लेकर भी पिछले दशकों में यहां उल्लेखनीय कार्य किया जा चुका है। इसमें डेक्कन कॉलेज पुणे के पूर्व निदेशक प्रो. वी.एन. मिश्रा ने 1969 से लेकर 1973 तक कुछ हिस्सों में सर्वेक्षण किया था, जिसमें तिलवाड़ा, सोजत, समदड़ी आदि में उत्खनन कार्य किया था। उन्हें यहां पाषाण काल के 50 हजार से 20 हजार वर्ष तक के आदिम संस्कृति के प्रमाण मिले थे।

रहस्यों को समेटे है लूनी
म्यूजियम क्यूरेटर डॉ. देवड़ा ने बताया कि लूनी नदी राजस्थान में बहने वाली प्रमुख एवं बड़ी नदियों में से एक हैं। राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में एक और जहां बनास नदी सबसे बड़ी है, वहीं इसके उत्तरी हिस्से में लूनी नदी है। अरावली पर्वत माला के विकास के आखिरी चरण में नदी घाटी का उद्भव हुआ था। नदी घाटी में अतीत के कई रहस्यों को छिपाए हुए है। आदिम मनुष्य के विकास क्रम से लेकर इसके इतिहास के कई साक्ष्य घाटी में हैं।

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इन क्षेत्रों में सर्वेक्षण

देवड़ा ने बताया कि उन्हें उत्खनन में पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विद्यामान होने प्रमाण मिले हैं। उन्होंने पेरवा, हथुंदी, जखोड़ा, कोठार, काग्दरा, चामुन्देरी, नाणा-बेड़ा, जवाई नदी ,भारुनदा, बिसलपुर, बीजापुर, तोकरिया, बाली, वेरावल, खिवांदी, सादड़ी, कम्बेश्वर, नेत्रा, निम्बौरनाथ, सान्देराव, सनवार, विरोली, विरवाड़ा, कसिन्द्रा, उद्वरिया, गोपी ढाणी, नराद्रा, जब्केश्वर, चोटिला, कानपुर स्थानों पर सर्वेक्षण करने के पश्चात पाषाणकालीन औजार प्राप्त किए।

ऐसे भी मिले औजार
चिंतन ठाकर ने बताया कि यह भू-भाग ग्रेनाइट की पहाडिय़ों से घिरा है। औजारों में कोर, फ्लुटेड कोर, फ्लेक्स, त्रिभुजाकार नुकीले औजार, दो धारी नुकीली चाकू, प्रस्तर के भाले का अग्र भाग व तीर का अग्र भाग, ब्लेड इत्यादी औजार खोजे गए। इनके अलावा कई स्थल पर पाषण व ऐतिहासिक कालीन भित्तिचित्रों के प्रमाण भी मिले है। यह सर्वेक्षण जारी है।

madhulika singh Reporting
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