मिलिए, उदयपुर के इन हुनरबाजों से...अपने हुनर व जुनून से पा रहे मुकाम..

मिलिए, उदयपुर के इन हुनरबाजों से...अपने हुनर व जुनून से पा रहे मुकाम..

Krishna Kumar Tanwar | Publish: Sep, 07 2018 05:52:20 PM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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मधुलिका सिंह/उदयपुर. रणबांकुरों की मेवाड़ी धरती में अब हुनर के हीरो अपनी नायाब पहचान बनाने में जुटे हैं। इनकी सोच है कि अगर आप में हुनर है और कुछ करने की ठान ली तो फिर नामुकिन रास्ता बीच में नहीं आएगा। न उम्र का बंधन अड़ेगा और ना ही अनुभव की कमी। बस जोश, जज्बा और जुनून चाहिए। शहर में कई ऐसे युवा हैं, जिन्होंने अपने हुनर व व जुनून से अलग हटकर मुकाम हासिल किया। परेशानियां तो दूर की बात है, परेशानियों का जलजला भी इन्हें अपने हौसलों से हिला नहीं पाया। कुछ ऐसे ही हुनरबाजों से रू-ब-रू करवाती पत्रिका प्लस का खास रिपोर्ट :-

 

इरादे फौलादी हैं तो पहाड़ भी कुछ नहीं: प्रिंकेश
नाथद्वारा निवासी प्रिंकेश जैन उदयपुर में प्राइवेट जॉब में हैं। उन्हें ट्रेकिंग का शौक शुरू से ही रहा है। ऐसे में वे पहाड़ों को नापने यूं ही निकल पड़ते हैं। हाल ही वे लद्दाख में आने वाली हिमालय की स्टॉक कांगरी पर चढ़ाई कर आए हैं। उत्तर-पश्चिम भारत के लद्दाख क्षेत्र में हिमालय की स्टोक रेंज में स्टोक कांगरी सबसे ऊंचा पर्वत है। इसकी ऊंचाई 6153 मीटर है। उन्होंने 27 अगस्त को लेह से स्टोक बेस केंप के लिए चढ़ाई शुरू की थी। 29 को वे स्टोक बेस कैंप पहुंचे और 30 अगस्त को उन्होंने स्टोक कांगड़ी पर चढ़ाई शुरू की। वे 31 अगस्त को सुबह 8.13 बजे इस ऊंची चोटी पर पहुंचने में कामयाब रहे। नाथद्वारा से संभवत: इस ऊंचाई पर पहुंचने वाले वे पहले युवा हैं। प्रिंकेश ने अपनी इस कामयाबी के बारे में कहा कि अगर इरादे फौलादी हैं तो पहाड़ भी आपके आगे छोटे हो जाते हैं।

 

katyayani

उम्र मत देखिए, टेलेंट देखिए : कात्यायानी
डीपीएस में पढऩे वाली 10 साल की कात्यायानी पंडित अपने हुनर का जलवा ना केवल देश बल्कि विदेशों में भी बिखेर चुकी हैं। कम उम्र में ही कात्यायानी ने कथक जैसा मुश्किल माने जाने वाला डांस फॉर्म सीखा और अपने परफॉरमेंस से जगह-जगह अवार्ड जीते हैं। श्रीलंका में उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर के डांस कॉम्पिटिशन के लिए ना केवल क्वालिफाई किया बल्कि वहां पुरस्कार भी जीता। वह पेंटिंग और पढ़ाई में भी अपने हुनर का लोहा मनवा चुकी है। नेपाल में 25-29 जुलाई तक आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में उसकी पेंटिंग 25 अन्य कलाकारों के साथ प्रदर्शित की गई और उसका सम्मान भी किया गया। कात्यायानी के पिता राजेश कुमार एयर कम्पनी में असिस्टेंट इंजीनियर हैं, वहीं माता ज्योति कुमारी गृहिणी हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी कात्यायानी नेशनल लेवल रेड आर्ट एग्जीबिशन इंदौर में भी गोल्ड मेडल जीत चुकी है।

 

 

himanshu

90 दिन 90 शोज का बना रहे रिकॉर्ड: हिमांशु

पिछले एक दशक से एंकर के तौर पर शहर में अपनी पहचान बना चुके हिमांशु जैन एक अनूठा 90 दिन, 90 शोज का रिकॉर्ड बनाने में लगे हुए हैं। हिमांशु ने बताया कि बतौर आरजे उन्होंने अपना कॅरियर शुरू किया था। अब वे अपने इस काम को बतौर रिकॉर्ड कायम करना चाहते हैं इसलिए 90 दिन 90 शोज का ये आइडिया उन्हें आया। वे जल्द ही इस टारगेट को पूरा कर लेंगे। इस रिकॉर्ड को बनाने के पीछे उनका मकसद ये है कि एंकरिंग के काम को पार्ट टाइम काम मानकर कई भावी कलाकार इस इंडस्ट्री में आते हैं और मौसमी बेरोजगारी के शिकार होकर ख़ुद को, परिजनों को निराश कर देते हैं ।असल में ये काम पार्ट टाइम नहीं है, इसे भी अगर उसी 10-8 के काम में लगने वाले एफर्ट के साथ, स्ट्रैटेजी बनाकर किया जाए तो कोई भी बेरोजगार नहीं रह सकता।

vipin

क्रिएटिविटी को हमेशा जिंदा रखिए : विपिन
उदयपुर के रहने वाले विपिन शर्मा वैसे तो बड़ी आईटी कंपनी में सीनियर प्रोसेस एग्जीक्यूटिव हैं लेकिन उनकी क्रिएटिविटी हमेशा उछालें मारती हैं। इसलिए अपनी क्रिएटिविटी उन्होंने अपने लेखन के जरिये दिखाई है। उन्होंने एक बुक लिखी है जिसका शीर्षक ‘एपिक लव स्टोरी’ है। विपिन ने बताया कि उन्हें लेखन का बचपन से ही शौक रहा है। अपने काम से समय निकालकर वे लेखन को देते हैं। ये उनकी पहली बुक है। इसमें एक लव स्टोरी है जिसमें सस्पेंस भी है। इसलिए ये पार्ट एक के तौर पर है। इसका दूसरा पार्ट भी वो लाएंगे। इसके अलावा अब दूसरी बुक पर भी काम शुरू कर दिया है। विपिन को लेखन के अलावा डांस और म्यूजिक का भी शौक है। उनका मानना है कि अपने अंदर की क्रिएटिविटी और हुनर को हमेशा जिंदा रखना चाहिए।

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