कोरोना नहीं छोड़ रहा पीछा तो इएसआईसी खाली करवाने का भी दबाव शुरू

- सवा दो लाख लोगों को इएसआईसी उपचार की जरूरत, बताओ कब खाली करोगे हॉस्पिटल ?

- सरकार ने पूछा है एमबी हॉस्पिटल प्रशासन ने

- यदि ये बंद करवाया तो एक मात्र विकल्प नजर में पशु चिकित्सालय

By: bhuvanesh pandya

Published: 19 Mar 2021, 09:55 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, वहीं एमबी प्रशासन इएसआईसी हॉस्पिटल में अन्य वार्ड शुरू करने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर सरकार ने एमबी प्रशासन से पूछा है कि इएसआईसी हॉस्पिटल में उनका अधिगृहण कब तक रहेगा। यानी सरकार अब जानना चाह रही है कि कब तक इएसआईसी हॉस्पिटल जिसे डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे वहां से कोविड मुक्त कब तक किया जाएगा। इस पर एमबी प्रशासन ने जिला प्रशासन के पाले में गेंद डालकर वहां से ही निर्णय होने का जवाब दे दिया है।

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ये मिला जवाब

आरटीआई में दिए जवाब में बताया कि सरकार की ओर से हस्तान्तरित किए गए इएसआईसी हॉस्पिटल को कोविड में लेने का फैसला जिला प्रशासन, जिला अधिकारी व राज्य सरकार द्वारा लिया जाता है। इसलिए इसे फ्री करने का निर्णय जिला प्रशासन, जिलाधिकारी व राज्य सरकार लेगी। ज्ञान रंजन नेहरा सहायक निदेशक चिकित्सा ने यह जवाब दिया है।

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छत व दीवारों को बनाया हॉस्पिटल
इएसआईसी हॉस्पिटल का जब अधिगृहण किया गया, तब वहां केवल छत व दीवारे ही थी। इसके अलावा पूरा हॉस्पिटल का सामान एमबी चिकित्सालय से ले जाकर जमाया गया। एमबी के 60 वेंटीलेटर, कई बायपेप मशीन, ऑक्सीजन पेनल, 200 बिस्तर, गद्दे, दवाइयां, इन्फ्यूजन पंप, ट्रॉली, साइड लोकर्स, अन्य उपकरण रखे गए हैं।

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इएसआईसी हॉस्पिटल शुरू करने के लिए चाहिए

उदयपुर में 100 बिस्तर का इएसआईसी चिकित्सालय है, ऐसे में यहा करीब 30 चिकित्सकों की जरूरत रहेगी, जबकि अभी केवल पांच चिकित्सक यहां पोस्टेड हैं। इसमें तीन चिकित्सक अलवर भेजे गए है। एनेस्थेटिक, शिशु रोग, के यहां ज्वाइन कर चुके है तो दो मेडिकल ऑफिसर कोविड में सेवाएं दे रहे है। ऐसे में अभी ये चिकित्सालय खाली भी हो जाता है तो इसे शुरू करने में काफी समय लगेगा। फिलहाल डिस्पेंसरी में ही जाना होता है। इएसआईसी की अशोकनगर, मादडी, सुखेर व डबोक में डिस्पेंसरी है, जहां उपचार होता है, लेकिन इस बड़े चिकित्सालय का लाभ नहीं मिल रहा।
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हमारे रिजनल निदेशक व दिल्ली मेडिकल कमिश्नर से जिला प्रशासन द्वारा बात की जाती है, निर्णय वहीं से होगा। यहां जिला प्रशासन इस पर फैसला लेता है।
कमलेश मीणा, असिस्टेंट डायरेक्टर इएसआईसी

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अभी तक तो हमारे पास पांच चिकित्सक व दो एमओ हैं। यदि शुरू किया जाता है, तो बजट हमारे पास सरकार ने जारी किया गया है। अभी तो मरीजों को डिस्पेंसरी में ही उपचार मिल रहा है। इसे फिर से शुरू करने को लेकर जानकारी नहीं।

डॉ विजेन्द्र मीणा, अधीक्षक इएसआइसी
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हां सरकार ने पूछा था कि कब तक अधिगृहण रहेगा, इस पर निर्णय जिला प्रशासन ही लेता है, हमारी ओर से इस पर ये जवाब भेजा गया है। यदि ये खाली करवाया जाता है तो समीप के पशु चिकित्सालय में काफी जगह है वहां पर करीब दो सौ बिस्तर लगाए जा सकते हैं।
डॉ आरएल सुमन, अधीक्षक एमबी हॉस्पिटल

bhuvanesh pandya
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