पूरा परिवार ही लग गया कोरोना को हराने में, फोन पर मां से बात कर मन भर आता है...

- होली के बाद गांव नही जा सके’- वृद्ध अकेली माँ गांव में सभी को आने में बाट देख रही

By: bhuvanesh pandya

Updated: 18 Apr 2020, 11:40 AM IST

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. ये उस परिवार की कहानी है जिसके अधिकांश सदस्य कोरोना को हराने में जी जान से जुटे हैं। यहां हम बात कर रहे हैं शहर के स्क्रीनिंग प्रभारी डॉ शंकर बामनिया की। सुबह जल्दी घर काम पर लगने के बाद उनकी रात जैसे आंखों में कटती है। बकौल बामनिया उनका पूरा परिवार ही इस काम को समर्पित होकर काम में जुटा हुआ है। अर्से से मां से नहीं मिले, अब मां का फोन आता है तो बात करते-करते ही मन भर आता है।

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डॉ शंकर बामनिया वरिष्ठ चिकित्सक, उपनिदेशक उदयपुर शहर में कोरोना महामारी से प्रभावी रोकथाम एव नियंत्रण करने के लिए कोविड-१९ का शहर प्रभारी नियुक्त किया गया है। जब इनके सूक्ष्म निगरानी में अर्बन कार्यालय भूपालपुरा से पूरे शहर के 9 सेक्टरों एव 3 सिटी डिस्पेंसरी क्षेत्र में हाउस टू हाउस एक्टिव सर्विलेंस सम्बंधित चिकित्सा संस्थानो के ए एन एमएआशा सहयोगिनी एव आंगनबाडी कार्यकर्ता द्वारा नियमित रूप से कराया जा रहे। साथ ही शहर में स्थित निजी एव सरकारी 24 नर्सिंग कॉलेज एव स्कूल की हर रोज 150 से ज्यादा नर्सिंग टीमो के द्वारा भी आवंटित निगम के विभिन्न वार्ड में एक्टिव सर्विलेंस करवाया जा रहा जिनकी दैनिक रिपोर्ट की जा रही हैं। इस तरह इनके नेतृत्व में 2 अप्रैल 2020 को रजा कॉलोनी मल्ला तलाई में पहला कोरोना पॉजिटिव आने पर उसी दिन से तथा 3 उसी परिवार से पॉजिटिव आने पर यहां काँटेन्मेंट जोन एव बफर जोन में नियमित रूप से एक्टिव सर्विलेंस 14 दिन तक कराया और शहर के शेष क्षेत्र में भी एक्टिव सर्विलेंस में भी जारी है। इस दौरान मिले संदिग्ध को सैंपलिंग, आइसोलेशन कराया गया तत्पश्चात कोई पॉजिटिव नही आय है। शहर पर 24 घण्टे कड़ी नजर हैं।

- डॉ राजमल बामनिया वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी महात्मा गांधी चिकित्सालय बांसवाडा में कोविड-19 योद्धा की तरह ओर चिकित्सको के साथ दो दो हाथ कर रहे है। ये उनके छोटे भाई हैं। बांसवाडा में कोरोना के बहुत ज्यादा केस पॉजिटिव आने पर उन्हें हाई अलर्ट पर रख दिया जिसकी वजह से 1 माह से अधिक समय हो गया घर नही गए।

- प्रभुलाल बामनिया मेल नर्स, जिला प्रतापगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात है, जहाँ स्टाफ की कमी के चलते हॉस्पिटल एव प्रतापगढ़ बांसवाडा के सीमा पर बारी बारी से 24 घण्टे ड्यूटी दे रहे है वह भी एक माह से घर नही गए है। ये बामनिया के छोटे भाई हैं।

- कांतिलाल बामनिया जो तहसील घाटोल में लेखाकार है राज्य सरकार के आदेशानुसार आम जनता में जरूरतमन्दों को राशन सामग्री वितरण में लगे होने कारण गांव नजदीक होने कारण भी नही जा पा रहे। ये बामनिया के सबसे छोटे भाई हैं। बुजुर्ग मां घर पर तक रही है राह...

इन चार भाइयो की कोरोना में अनिवार्य सेवा होने कारण 1 माह से अधिक समय से घर नही जा पा रहे है, इनकी वृद्ध माँ रतन देवी जो विधवा है पुत्रों को जल्दी घर आने रोज आस लगाकर आँखे गड़ाए राह को निहारती रहती हैं। माँ अकेली ने 30 बीघा में गेहूं एव मक्का की फ सल कटाई एव गेंहू निकालने काम मजदूरों से कराती रहती हैं। पुत्रो से मोबाइल पर बात कर हॉल चाल पूछकर उनकी आँखें भर जाती हैं।

डॉ शंकर बामनिया के दो पुत्र है बड़ा उदयपुर में पटेल सर्कल पर ए वी वी एन एल में सहायक इंजीनियर है जो एक एसेंशियल सेवा में होकर नियमित सेवाएं दे रहे हैं। कभी कभी तो रात की 11 बज जाती हैं। उनका छोटा पुत्र डॉ विकास बामनिया जो कोटा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर कोटा मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप कर रहा है, जो फिलहाल कोटा मेडिकल कॉलेज में रेपिड रेस्पॉन्स टीम में नियमित सेवाएं दे रहा है। पिछले दो माह से घर नही लौटा।

bhuvanesh pandya Reporting
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