ये है कोरोना के मिथक, हम बता रहे हैं सच

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार

भुवनेश पंड्या


उदयपुर. कोरोना संक्रमण को लेकर कई मिथक हैं, आइए हम बताते हैं आपको क्या है सच।

मिथक - गर्म मौसम कोरोना वायरस को मार सकता है।

सच: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस सभी क्षेत्रों में प्रसारित होता है, जिसमें गर्म और आद्र्र मौसम वाले क्षेत्र शामिल हैं।मिथक: गर्म स्नान करने से नए कोरोना वायरस रोग को रोका जा सकता है।

सच: गर्म स्नान करने से कोरोना को नहंी रोका जा सकता। खुद के बचाव के लिए लगातार हाथों की सफाई जरूरी है।

मिथक: आपके शरीर पर अल्कोहल या क्लोरीन का छिडक़ाव करने से कोरोना वायरस की मौत हो जाती है

सच: डब्लूएचओ के अनुसार शरीर में शराब या क्लोरीन का छिडक़ाव करने से आपके शरीर में पहले से ही प्रवेश हो चुके वायरस नहीं मरते। इससे आंख व मुंह को नुकसान हो सकता है।

मिथक: लहसून खाने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मदद मिलती हैसच: इस तरह का कोई तथ्यात्मक सबूत नहीं है। मिथक: संक्रमित क्षेत्र से एक पत्र या पैकेट लेना असुरक्षित है

सच: उत्पादों या पैकेजिंग से फैलने की संभावना बहुत कम होती है, क्योंकि ये कागज पर ज्यादा देर तक नहीं रुकता।

मिथक: नए कोरोनो वायरस केवल बुजुर्गों को ही प्रभावित करते हैं ?

सच: सभी उम्र के लोग कोरोनो से संक्रमित हो सकते हैं। बुजुर्गों में कई बीमारियां होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए ये असर ज्यादा होता है।

मिथक: एंटीबायोटिक्स कोरोना को रोकने और उनका इलाज करने में प्रभावी हैं

सच: नहीं, एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करते।

मिथक: नियमित रूप से अपनी नाक को रगडऩे से संक्रमण रुक सकता है।

सच: कोई सबूत नहीं है।

मिथक: थर्मल स्केनर आसानी से संक्रमित लोगों का पता लगा सकते हैं।

सच: थर्मल स्केनर से तापमान का पता चल जाता है, जिससे बुखार की स्थिति बनती है।

मिथक: निमोनिया का टीका वायरस रोक सकता है।

सच: नहीं, न्यूमोकोकल वैक्सीन और हीमोफि ल्स इन्फ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन इसके खिलाफ सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं।

मिथक: पालतू जानवर बिल्लियां और कुत्तों से कोरोना फैल रहा है।

सच: वर्तमान में इस बात का कोई सबूत नहीं है।

मिथक : कोविड-19 को ठीक करने के लिए एक टीका उपलब्ध है।

सच- वर्तमान में कोरोना वायरस के लिए कोई टीका नहीं है। वैज्ञानिकों ने पहले से ही एक पर काम करना शुरू कर दिया है, लेकिन मानव की सुरक्षा के लिए वैक्सीन विकसित करने में कई महीने लगेंगे।

bhuvanesh pandya Reporting
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