बाघ के हमले में हुई बाघ‍िन की मौत ने खड़़े़े कर द‍िए कई सवाल, बाघ‍िन के केयरटेकर और व‍िशेषज्ञ ये बोले..

बाघिन के मौत के घटनाक्रम ने सज्जनगढ़ बायलॉजिकल पार्क में सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान

By: madhulika singh

Published: 03 Jan 2020, 03:14 PM IST

उदयपुर. बाघ-बाघिन के बीच हुए खूनी संघर्ष में बाघिन के मौत के घटनाक्रम ने सज्जनगढ़ बायलॉजिकल पार्क में सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान लग गए। इस पार्क में बाघ से भी ताकतवार टी-24 से लेकर अन्य वन्यजीव कैद हैंं। शुक्र है कि यह बाघ एनक्लोजर से बाहर नहीं न‍िकला, दामिनी की एनक्लोजर की जगह अगर पार्क में बाहर निकल जाता तो कई लोगों को मुंह का निवाला बना देता।
बाघ बाघिन के हमले के इस घटनाक्रम के दौरान बायलोजिकल पार्क में करीब 50 से 60 पर्यटक मौजूद थे। अधिकांश पर्यटकों ने मोबाइल से हमले के पूरे घटनाक्रम को मोबाइल में कैद किया। बाघ के बार-बार गुर्राने पर भी वे कई बार इधर-उधर हुए। घटनाक्रम के मौके पर केयरटेकर व अन्य छोटे कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करीब एक घंटे के बाद वन अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद सभी पर्यटकों को बाहर कर बायलॉजिकल पार्क का गेट बंद किया गया।

दो बार पूर्व में भी झपट्टा मार चुका बाघ

केयर टेकर रामसिंह व चिकित्सक करमेन्द्र प्रतापसिंह ने बताया कि कुमार को वर्ष 2017 में पीलीकुआं जू मंगलौर कर्नाटक से लाया गया था। उसकी उम्र करीब 12 वर्ष 6 माह है। यहां आया तभी से इसका उग्र स्वभाव रहा है। इसी कारण से इसे दामिनी से अलग रखा था। एक साल की अवधि में दो बार पहले भी फैंसिंग में झपट्टा मारकर कान व पांव पर चोट पहुंचाई थी। वह दामिनी को देख कई बार गुर्राता रहता था। इसकी उग्र प्रवृत्ति के कारण इन्हें कभी भी नहीं मिलाया गया। वन्य अधिकारियों ने बताया कि दामिनी को वर्ष 2015 में राजीव गांधी जू पूणे से लाया गया था। इसकी उम्र 15 वर्ष थी।
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नर-मादा बाघ-बघिन का प्राकृतिक व्यवहार ही ऐसा होता है और यह हमेशा टेरेटरी बनाकर रहते है। जू में ही नहीं अभ्यारण्यों में भी टेरेटरी को लेकर इनके बीच जंग होती रहती है। आधिपत्य जमाने को लेकर इनके बीच हिंसक वारदातें होना स्वाभाविक है। एनक्लोजर में चाहे नर हो या मादा हो लघुशंका करने के बाद भी ये अपने एरिये को लेकर एक दूसरे पर हमला करते है, जो ताकतवर होता है वह शिकार बना लेता है। कई बार अटैक होने के बाद भाग भी जाते है। यह कोई नई घटना नहीं है। पैंथर के बीच भी ऐसी कई हिंसक घटनाएं होती रही है। गत फरवरी माह में भी लंदन जू में भी नर ने मादा पर हमला कर मार दिया था।
सतीश शर्मा, वन्यजीव विशेषज्ञ

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टाइगर प्रजाति एक दूसरे की टेरेटरी में दखल पसंद नहीं करते है। इसको लेकर ऐसी घटनाएं होती है। उनके स्वभाव में ही ऐसा होता है। यह हादसा कहीं न कहीं तकनीकी खामी के कारण हो सकता है। फैसिंग की बनावट में कहीं कमजोरी रही होगी। इसकी वजह से फैसिंग टूटी है अन्यथा वह तकनीकी मापदंडों के अनुरुप बनाई जाने वाली वह टूट नहीं सकती है। ऐसा पहले कभी हुआ नहीं है। कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाई जानी चाहिए ताकि फिर ऐसी कोई घटनाएं नहीं हो।

राहुल भटनागर, सेवानिवृत्त मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक

कई अनसुलझे सवाल
- बाघ ने पूर्व में भी फैंसिंग पर झपट्टा मारकर बाघिन को चोट पहुंचाई तो विभाग ने क्या किया था

- फैंसिंग पर वह बार-बार मुंह व पंजा मार रहा था तो उसे कब जांच की गई
- पंजे से फैंसिंग ढिली हुई तो इस पर ध्यान क्यूं नहीं दिया गया

- फैंसिंग मापदंड के अनुरुप थी या नहीं
- फैंसिंग को अगर बाघ ने ताकत से तोड़ा तो बाहर निकलने के दौरान उसे भी चोट लगी या नहीं

- बायलोजिकल पार्क में कई एनक्लोजर बने हुए है उन्हें कब जांचा गया

madhulika singh Reporting
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