उदयपुर में पांच दिवसीय कला उत्सव 'लोकलोर ' शुरू, द‍िखेगी भारतीय आदिम जनजाति कला की झलक

उदयपुर में पांच दिवसीय कला उत्सव 'लोकलोर ' शुरू, द‍िखेगी भारतीय आदिम जनजाति कला की झलक

Madhulika Singh | Publish: Mar, 11 2019 02:16:48 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं सुविवि का साझा आयोजन

- 14 मार्च तक जारी रहेगी अन्तरराष्ट्रीय कार्यशाला

राकेश शर्मा राजदीप/ उदयपुर . 'जनजातीय कला मनुष्य सभ्यता की अनवरत यात्रा की साक्षी है। लोक कला ही समस्त मनुष्य समुदाय में समायोजन और समन्वय की आधारशिला है। ' ये विचार संभागीय आयुक्त भवानीसिंह देथा ने रविवार को पांच दिवसीय कला उत्सव 'लोकलोर ' के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए।

गौरतलब है कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 14 मार्च तक चलने वाली इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में देश-विदेश के नामचीन आदिवासियों सहित भारतीय आदिम कला की प्रतिनिधि कला विधाओं के कलाकारों को सम्मिलित किया है।

आयोजन सचिव प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने बताया कि गोंड पेंटिंग में मयंक श्याम, मधुबनी पेंटिंग में श्रवण कुमार, महाराष्ट्र वरली पेंटिंग में मयूर वयड़ा, लेदर पपेट पेंटिंग में एस चिदम्बरम राव, पिथौरा पेंटिंग में देसिंग, मीणा पेंटिंग में ओम प्रकाश मीणा, मेवाड़ भील पेंटिंग में फूला पारगी सहित शिव कुमार व किशोर जैसे परम्परावादी कलाकार भागीदारी निभा रहे हैं।

इस मौके पर वरिष्ठ चित्रकार प्रो. सुरेश शर्मा ने कुम्भलगढ़ में आयोजित कार्यशाला विबग्योर के केटलॉग सहित डॉ. मयंक शर्मा की पुस्तक मेवाड़ क्षेत्र के जनजातीय पूजा स्थलों में संस्थापन कला का विमोचन भी किया।

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