लापरवाही उजागर: चार वर्ष में धंसी टनल, बना गड्ढ़ा, करनाली से डामरवाड़ा के बीच सडक़ किनारे टीले पर हुई घटना

उदयपुर . करनाली से डामरवाड़ा के बीच एक टीला का सौ गुणा पचास फीट का हिस्सा शुक्रवार तडक़े धंस गया।

By: jyoti Jain

Published: 11 Nov 2017, 10:24 AM IST

उदयपुर . देवास द्वितीय योजना में बने आकोदड़ा-मादड़ी डेम से शहर की झीलों को भरने के लिए पहाड़ों को चीर कर निकाली गई करीब 11.25 किलोमीटर लम्बी टनल पर करनाली से डामरवाड़ा के बीच एक टीला का सौ गुणा पचास फीट का हिस्सा शुक्रवार तडक़े धंस गया। टनल निर्माण के दौरान ही इस हिस्से में कैविटी पॉकेट होने की जानकारी सामने आने के बावजूद विभाग ने लापरवाही बरती जिससे महज चार वर्ष में ही टनल का ऊपरी हिस्सा धंस गया। इधर, विभागीय अधिकारी मामले में कुछ भी बताने से कतराते रहे।

 

आकोदड़ा एवं मादड़ी दोनों बांध का पानी टनल के जरिये कोडियात होते हुए पिछोला झील में समाता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि देखते ही देखते यह हिस्सा बड़ा होता गया और सुबह 9 बजे तक करीब 100 फीट लंबा और 50 फीट चौड़ा और 50 फीट गहरा गड्ढ़ा हो गया जिससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

 

READ MORE: मेवाड़ में चमक बिखेर सकती है मोती की खेती, यहां सिखा रहे इसकी तकनीक


टीलों पर रहते हैं आदिवासी : आकोदड़ा-मादड़ी की टनल कई टीलों के नीचे से गुजर रही है। इस क्षेत्र में ग्रामीण दिनभर कार्य करते हैं और कई जगह तो उनके कच्चे मकान भी बने हुए हैं। ऐसे में जमीन धंसने से कभी भी जानमाल का नुकसान हो सकता है।


घटना की सूचना मिली है। एहतियात के तौर पर जाप्ता लगा दिया गया है एवं बोर्ड लगा दिए गए हैं। घटना की विशेषज्ञों को भी सूचना दी गई है।
ब्रजेश गुप्ता, गिर्वा तहसीलदार

 


पानी छोडऩे पर स्थिति होगी स्पष्ट
विभाग घटना सामने आने के बाद जब टनल में पूरे वेग से पानी छोड़ेगा तब ही स्पष्ट हो पाएगा कि टनल धंसी है या मिट्टी ने बैठक ली है।

 

एक्सपर्ट जाएंगे टनल में

प्रथमदृष्टया टनल गिरने जैसा मामला नहीं है। हमने एक्सपर्ट बुलाए हैं तो शनिवार को टनल में जाएंगे और इसका मुआयना करेंगे। इसके साथ ही भू वैज्ञानिकों से भी राय ली जाएगी। आज हमने आकोदड़ा डेम से पानी छोडकऱ टनल की जांच की है। पानी साफ और निर्बाध आ रहा है जिससे टनल टूटने जैसा मामला नहीं है। यह कार्य 7-8 वर्ष पहले हुआ था।

तब तीन-चार कैविटी आई थी। उस वक्त सेंड भरी गई थी। हो सकता है कि यह सेंड अब सेट हुई हो। कभी-कभी भौगोलिक परिस्थितियां भी कारण होती है। मौके पर दो सौ फीट नीचे टनल बनी हुई है।
- राजेश टेपण, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग।

jyoti Jain
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned