जिसका काम उसी को साजे, कोई और करे तो डंडा बाजे, जानें क्या है मामला...

जिसका काम उसी को साजे, कोई और करे तो डंडा बाजे, जानें क्या है मामला...

Mukesh Hingar | Publish: Feb, 19 2019 01:17:41 PM (IST) | Updated: Feb, 19 2019 01:17:42 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- अब चेते, राजस्व वालों को बोले संभालो काम

मुकेश हिंगड़/उदयपुर . नगर निगम की तिजोरी में नगरीय विकास शुल्क के मद में सालाना 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की आवक होती है, लेकिन इसके रास्ते में कई अड़चनें है। अब मार्च आने वाला तो इसके कर्ताधर्ता को गलती का अहसास हुआ। ऐसे में कुछ अदला-बदली की क्योंकि जिसका काम उसी को साजे! कोई और करे तो डंडा बाजे। लक्ष्य हासिल करने में अब करीब 40 दिन शेष हैं।
असल में नगर निगम नगरीय विकास शुल्क (यूडी टैक्स) की वसूलने में इस बार फिसड्डी साबित होने जा रहा है। निगम ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में करीब 12.49 करोड़ रुपए का टैक्स वसूला जबकि इस वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 4.90 करोड़ रुपए का टैक्स ही वसूला जा सका है। पत्रिका ने इसके कारणों की पड़ताल की तो अजग कहानी सामने आई। यूडी टैक्स वसूली का जिम्मा राजस्व निरीक्षक तरंग यादव के पास था। उन्होंने वीआरएस ले लिया तो निगम ने उनका प्रभार परियोजना अधिकारी शैलसिंह को दे दिया जिनके पास राज्य सरकार की योजनाओं का शहरी क्षेत्र में क्रियान्वयन करवाने का जिम्मा था।

 

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आंकड़ा देखा तो नींद खुली
वित्तीय वर्ष खत्म होने के नजदीक है। पत्रिका ने जब एक खबर प्रकाशित कर बताया कि यूडी टैक्स वसूलने में निगम बहुत पीछे है तो निगम की नींद खुली। उसकी पड़ताल में हकीकत सामने आई। निगम ने तत्काल परियोजना अधिकारी की जगह यूडी टैक्स वसूली का काम जनवरी के अंतिम सप्ताह में मूल रूप से जिम्मेदार राजस्व अधिकारी संदीप दाधीच को दे दिया। उनके समक्ष दो माह में यूडी टैक्स में आठ करोड़ से अधिक का लक्ष्य अर्जित करने की चुनौती है।

अब बन रही सूचियां
अंतिम तिथि नजदीक आई तो राजस्व विभाग ने अपनी कवायद तेज कर दी है। यूडी टैक्स नहीं जमा करवाने वालों की सूचियां तैयार की जा रही है। साथ ही उनको नोटिस जारी किए जा रहे है। जिनको नोटिस देकर विधिक प्रक्रिया पूरी कर ली है, उनकी सम्पत्ति को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है।


ये चुनौतियां भी
राजस्व विभाग में चार सहायक राजस्व अधिकारी है, जिनमें से एक को ही यूडी टैक्स का काम दे रखा है। फील्ड में उगाही करने वाले पटवारी व अन्य स्टाफ भी नहीं है, पहले संविदा के पटवारी थे। यूडी टैक्स का कार्य संभालने के लिए अभी एक बाबू लगा है, वह भी आधे दिन के लिए। अभी एक कर्मचारी संविदा पर लगा है जबकि पहले दो थे।

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