अनाथों के खुल रहे भाग्य, मसीहा बनकर आ रहे दम्पती भर रहे कोख

अनाथों के खुल रहे भाग्य, मसीहा बनकर आ रहे दम्पती भर रहे कोख

By: Mohammed illiyas

Published: 15 Nov 2020, 01:14 PM IST

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
विमंदित, लाचार व अनाथ बच्चों की परवरिश के लिए राजकीय किशोर व शिशुगृह में नए मां-बाप मसीहा बनकर सामने आ रहे है। पारिवारिक माहौल देने के लिए ऐसे बच्चों को बाल संरक्षण इकाई व सीडब्ल्यूसी फोस्टर केयर स्कीम के तहत उन्हें पालन पोषण के लिए सौंप रही है। अब तक राजकीय शिशुगृह से 13 बच्चे ऐसे दम्पती के सुुपुर्द किए गए जो धर्मस्थलों पर मत्था टेक रहे थे या सक्षम परिवार से थे।
सोमवार को भी शिशुगृह से ऐसे ही दो बच्चों को बाल कल्याण समिति के सदस्य डॉ. शिल्पा महता, जिग्नेश दवे,सुरेश शर्मा, राजीव मेघवाल के साथ जिला बाल संरक्षण इकाई की अधीक्षक मीना शर्मा, किशोर गृह अधीक्षक चन्द्रवंशी, फोस्टर केयर सोसायटी के अनुराग मेहता कुसुम पालीवाल व रेखा शेखावत ने नए माता-पिता के सुपुर्द किया गया। सरकारी सेवा व सामाजिक कार्यो में अग्रणी यह माता-पिता उन बच्चों को पाकर काफी गदगद हुआ। नए मां-बाप का कहना कि हम तो कुछ नहीं है भगवान ने जो सेवा मौका दिया है उसे निभाते हुए बच्चों को भी वो सब देंगे जो अपनों को दिया है।
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स्कीम सुनकर ही कई ने गोद के आवेदन लिए वापस
उदयपुर बाल कल्याण समिति ने पूर्व में भी बच्चों को गोद के लिए आवेदन करने वाले माता-पिता को फॉस्टर केयर स्कीम के बारे में समझाया तो कई दम्पती ने अपना आवेदन वापस ले लिया। वे राजकीय शिशुगृह में उन 13 बच्चों को अपने साथ ले गए जो कभी पारिवारिक माहौल को तरस रहे थे। यह मां-बाप 18 साल तक बच्चे की देखभाल करेंगे। इसके बाद बच्चे की इच्छा पर उन्हें कहीं भी जाने की इजाजत होगी। वह पालन.पोषण करने वाले नए मां.बाप की सम्पत्ति पर हक नहीं जता सकता वहीं मां.बाप उसे दत्तक नहीं कह सकते हैं।
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क्या है फोस्टर केयर
राजस्थान सरकार ने जुलाई 2014 में राजस्थान पालन पोषण देखभाल फॉस्टर केयर नियम 2014 लागू किया था। इनमें ऐसे बच्चे जिन्हें किन्हीं कारणों से दत्तक ग्रहण, गोद नहीं दिया जा सकता है या लम्बे समय से वे बालगृहों में आवासरत हैं तो उन्हें पारिवारिक माहौल देते हुए देखभाल, स्वास्थ्य एवं भावनात्मक अपनत्व की पूर्ति एवं उनके सर्वोत्तम हित के लिए किसी परिवार को सुपुर्द किया जाता है।
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यह है नियम
फॉस्टर केयर के लिए दम्पती आवेदन करते हैं तो उनकी न्यूनतम आयु 25 वर्ष व अधिकतम 65 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर अकेला पुरुष आवेदन करता है तो वह बालिका को नहीं ले सकेगा। ऐसे माता.पिता का आपराधिक प्रकरण न्यायालय में लम्बित नहीं होना चाहिए।
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फॉस्टर केयर एक वैकल्पिक देखभाल का प्रकार हैं जिसमें बच्चों का सर्वोत्तम हित सुनिश्चित किया जाता है। दो भाइयों को पारिवारिक माहौल व देखभाल के लिए एक परिवार के सुपुर्द किया गया।
मीना शर्मा, अधीक्षक,जिला बाल संरक्षण इकाई
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वर्तमान में 13 बच्चों को पोषक परिवार में दिया जा चुका है। व्यक्तिगत पालन पोषण देखभाल में उदयपुर जिला पूरे भारतवर्ष में पहले स्थान पर है।
डॉ. शिल्पा मेहता, बाल कल्याण समिति सदस्य

Mohammed illiyas Reporting
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